हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौ. आरिफ) हरिद्वार। आपको बता दें कि सड़क पर ज्यादा कर हादसे अवर स्पीड, लाल बत्ती की अनदेखी, सड़कों में गड्ढे ,गाड़ी चलाते हुए मोबाइल पर बात करना तो है ही। नशे में गाड़ी चलाना भी बहुत बडा़ कारण है। आंकड़ों के मुताबिक 40 फ़ीसदी से अधिक दुर्घटनाएं चालक के नशे मे होने से होती है। चालक अलग अलग किस्म के नशे कर गाड़ियों को तेज स्पीड से चलाते हैं। जिससे ज्यादा कर सड़क हादसों के शिकार हो जाते हैं। नशे से बढ़ती हुई सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए  यातायात हेतु मित्र पुलिस द्वारा एल्कोमीटर के साथ सघन अभियान चलाया गया। नशे के विरुद्ध अभियान में वाहन चालकों को एल्कोलमीटर से चेक किया गया। पुलिस का नशे के विरुद्ध यह अभियान सराहनीय कार्य है। लेकिन पुलिस ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालक को मामूली जुर्माना वसूल कर न छोड़े। जबकि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए। कि जुर्माने के साथ-साथ ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर सख्त सजा भी हो। दरअसल जागरूकता के साथ साथ अब कुछ ऐसी पहल की जरूरत है। जो सड़कों को खूनी बनाने से रोक सके। आपको बता दें कि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर भारत में जुर्माना या सजा काफी कम है। लिहाजा शासन-प्रशासन के द्वारा उसे सख्त किए जाने की जरूरत है। यह नियम सिर्फ ट्रैफिक नियम की बेहतरी के लिए नहीं बनाए जाए। बल्कि इसलिए बनाए जाए। ताकि जिंदगी सड़कों पर खुशहाल हो और सड़कों पर दुर्घटना या मौत में तब्दील होने की नौबत न आए। सड़के जीवन की सुगमता के लिए है। न की मौत के लिए।
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