हरिद्वार की गूंज
(रजत चौहान) हरिद्वार। जहां एक तरफ अतिक्रमण हटाने में प्रशाशन ने कमर कस कर तेजी से अभियान चला रखा है वही ये अपने ही विभाग द्वारा की गई पैमाइश से अधिकारियो के चेहरे में असमंजस की झलक साफ झलकती नजर आती है, एक ही स्थान में पैमाइश के बाद भी अधिकारियों को इंचीटेप लेकर दोबारा पैमाइश करने आना पड़ रहा है जिस कारण व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है और व्यापारी वर्ग परेशान भी है और हर व्यापारी के दिमाग मे एक ही सवाल उठ रहा है कि किन मानकों के अनुरूप नपाई हो रही नपाई के मानक क्या है किसी के समज नही आ रहा किसी की दुकान के सामने 60 फिट की सड़क है तो किसी की दुकान के आगे 64 फिट की सड़क हो रही है आखिर व्यापारी जाए तो जाए कहा जहां एक तरफ अब त्योहारों ने दस्तक देनी शुरू कर दी है वही दुकानों की तोड़फोड़ से व्यापारी काफी चिंतित है एयर ये भी चर्चाओं का बाजार गर्म है कि व्यापारी पैसा त्योहारों के लिए समान में लगाये या वो पैसा दुकान पर लगाये व्यापारियों का यह भी कहना है कि सरकार ने शायद आंखों में पट्टी बांध ली है और अच्छे दिन आएंगे का नारा  भूल गई है और व्यापारियों के शोषण में लग गयी है वही दूसरी तरफ हरिद्वार सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक भी अतिक्रमण हटाने के दौरान अधिकारियों के रवैये से भी काफी आगबबूला हो गए प्रेस से वार्ता के दौरान निशंक जी का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ आंदोलन को लेकर शहरी विकास मंत्री और मुख्यमंत्री से भी बात की है निशंक जी का कहना है कि अधिकारियों द्वारा बिन पूर्व सूचना में आ धमकाना और पीले पंजे से लोगो के घर और प्रतिष्ठान को ध्वस्त करने बेहद ही निंदनीय है और अतिक्रमण के नाम पर कोर्ट के आदेश दिखाते हुए प्रशासनिक
अधिकारी जनता का शौषण कर रहे है।
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