हरिद्वार की गूंज
(गगन शर्मा) हरिद्वार। सीपीयू द्वारा आज लक्सर रोड के जगजीतपुर पुलिस चौकी पर भोलेनाथ की वेशभूषा में युवक के साथ दुर्घटनाओं में जीवन की रक्षा हेतु दो पहिये वाहन चालकों को हेलमेट पहनाये। साथ ही साथ जनता को जागरूक करने के लिए एक बोर्ड भी लगाया गया जिसमें भगवान गणेश द्वारा सन्देश दिया जा रहा था कि उस युग मे तो शल्य चिकित्सा द्वारा सर बदल दिया गया था जो कि अब सम्भव नही हो पायेगा, अतः हेलमेट अवश्य पहने। जनता को इस प्रकार के सुंदर संदेशो के बीच मे दूसरे तरह के सन्देश भी दिए जा रहे थे कि एक युवक जो कि एक अखबार के प्रेस कार्यालय में काम करता है वह सीपीयू वालो के लिये कुछ खाने का सामान बिना हेलमेट के स्कूटी पर गया और आया। उसका चालान नही काटा गया, बल्कि वह इस खुशी में कि सीपीयू वाले जान पहचान के है उसका चालान कैसे काटेंगे खुश था। जिसे देखकर अन्य वाहन चालक बहुत कुछ कहना चाहते थे मगर डर के कारण चुप थे। उसके कुछ देर बाद एक कांस्टेबल इसी पुलिस चौकी और सीपीयू वालो के बीच से गुजर गया मगर स्टाफ होने के कारण सीपीयू कर्मी बेबसी के कारण बूत बनकर खड़ा होकर देखता रहा। सीपीयू कर्मियों द्वारा जनता और जान पहचान करने वालो के बीच पक्ष पात करने के कारण आम जनता का सीपीयू पर भरोसा उठ गया है। जबकि पिछले कई सालों से सीपीयू कर्मियों द्वारा अपनी सेवाओं और जनहित भावनाओ से दिल भी जीता है। कुछ महीने पूर्व एसएसपी द्वारा हेलमेट के बिना बाइक चलाने पर एक कांस्टेबल को सस्पेंड करने पर 99% पुलिस वालों ने हेलमेट पहनने शुरू कर दिये थे। लगता है कि उसका प्रभाव ब समाप्त हो गया है। ये बात प्रेस वाले, पुलिस वाले और खुद को वीआईपी समझने वाले कब समझेगे कि हेलमेट अपने परिवार से पुनः मिलने के लिए पहने न कि दिखावे के लिए।
(गगन शर्मा) हरिद्वार। सीपीयू द्वारा आज लक्सर रोड के जगजीतपुर पुलिस चौकी पर भोलेनाथ की वेशभूषा में युवक के साथ दुर्घटनाओं में जीवन की रक्षा हेतु दो पहिये वाहन चालकों को हेलमेट पहनाये। साथ ही साथ जनता को जागरूक करने के लिए एक बोर्ड भी लगाया गया जिसमें भगवान गणेश द्वारा सन्देश दिया जा रहा था कि उस युग मे तो शल्य चिकित्सा द्वारा सर बदल दिया गया था जो कि अब सम्भव नही हो पायेगा, अतः हेलमेट अवश्य पहने। जनता को इस प्रकार के सुंदर संदेशो के बीच मे दूसरे तरह के सन्देश भी दिए जा रहे थे कि एक युवक जो कि एक अखबार के प्रेस कार्यालय में काम करता है वह सीपीयू वालो के लिये कुछ खाने का सामान बिना हेलमेट के स्कूटी पर गया और आया। उसका चालान नही काटा गया, बल्कि वह इस खुशी में कि सीपीयू वाले जान पहचान के है उसका चालान कैसे काटेंगे खुश था। जिसे देखकर अन्य वाहन चालक बहुत कुछ कहना चाहते थे मगर डर के कारण चुप थे। उसके कुछ देर बाद एक कांस्टेबल इसी पुलिस चौकी और सीपीयू वालो के बीच से गुजर गया मगर स्टाफ होने के कारण सीपीयू कर्मी बेबसी के कारण बूत बनकर खड़ा होकर देखता रहा। सीपीयू कर्मियों द्वारा जनता और जान पहचान करने वालो के बीच पक्ष पात करने के कारण आम जनता का सीपीयू पर भरोसा उठ गया है। जबकि पिछले कई सालों से सीपीयू कर्मियों द्वारा अपनी सेवाओं और जनहित भावनाओ से दिल भी जीता है। कुछ महीने पूर्व एसएसपी द्वारा हेलमेट के बिना बाइक चलाने पर एक कांस्टेबल को सस्पेंड करने पर 99% पुलिस वालों ने हेलमेट पहनने शुरू कर दिये थे। लगता है कि उसका प्रभाव ब समाप्त हो गया है। ये बात प्रेस वाले, पुलिस वाले और खुद को वीआईपी समझने वाले कब समझेगे कि हेलमेट अपने परिवार से पुनः मिलने के लिए पहने न कि दिखावे के लिए।



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