हरिद्वार की गूंज
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। उपनगरी ज्वालापुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे मरीजो और तीमारदारो द्वारा एक मामला प्रकाश मे आया है, वो ये है, कि गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड मे भेदभाव किया जा रहा है, ज्वालापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे इस्लाम नामक युवक ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कराने हेतू पर्चा जमा करने के बाद वहाँ तैनात कर्मचारी विशेष समुदाय के पर्चे को नीचे दबाकर दूसरे समुदाय के मरीजो का अल्ट्रासाउंड कर रहे है, ऐसी ही शिकायत फरीद नामक युवक ने की कुछ लोगो का तो ये भी कहना है,कि कुछ लोग तो अन्दर की तरफ से जाकर अपने मरीज का अल्ट्रासाउंड कराके अपने घर को जाते है, और एक विशेष समुदाय की गर्भवती महिलाएं अपनी बारी का इंतेज़ार फर्स पर बैठकर देखती रहती है, तैनात कर्मचारी केवल नाम मात्र को विशेष समुदाय की गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर देते है, और जो महिलाएं रह जाती है, उन्हे समय खत्म हो गया का बहाना करके कह देते है, कि कल आना भगवान रूपी चिकित्सको द्वारा इस प्रकार की कार्यप्रणाली का होना ठीक नही है, चिकित्सक भी यदि धर्म के आधार पर इलाज करेंगे तो फिर मानवता भारत मे कहाँ रहेगी हमारा मकसद किसी की भावनाएं आहत करना नही है, बस हमारा मकसद ये है, यदि इस प्रकार से भगवान रूपी चिकित्सक काम कर रहे है, तो उनको अपने पेशे का ख्याल रखना चाहिए, ताकि लोगो मे मन मे ये बात ना पैदा हो कि चिकित्सक धर्म के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहे है।
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। उपनगरी ज्वालापुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे मरीजो और तीमारदारो द्वारा एक मामला प्रकाश मे आया है, वो ये है, कि गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड मे भेदभाव किया जा रहा है, ज्वालापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मे इस्लाम नामक युवक ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कराने हेतू पर्चा जमा करने के बाद वहाँ तैनात कर्मचारी विशेष समुदाय के पर्चे को नीचे दबाकर दूसरे समुदाय के मरीजो का अल्ट्रासाउंड कर रहे है, ऐसी ही शिकायत फरीद नामक युवक ने की कुछ लोगो का तो ये भी कहना है,कि कुछ लोग तो अन्दर की तरफ से जाकर अपने मरीज का अल्ट्रासाउंड कराके अपने घर को जाते है, और एक विशेष समुदाय की गर्भवती महिलाएं अपनी बारी का इंतेज़ार फर्स पर बैठकर देखती रहती है, तैनात कर्मचारी केवल नाम मात्र को विशेष समुदाय की गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर देते है, और जो महिलाएं रह जाती है, उन्हे समय खत्म हो गया का बहाना करके कह देते है, कि कल आना भगवान रूपी चिकित्सको द्वारा इस प्रकार की कार्यप्रणाली का होना ठीक नही है, चिकित्सक भी यदि धर्म के आधार पर इलाज करेंगे तो फिर मानवता भारत मे कहाँ रहेगी हमारा मकसद किसी की भावनाएं आहत करना नही है, बस हमारा मकसद ये है, यदि इस प्रकार से भगवान रूपी चिकित्सक काम कर रहे है, तो उनको अपने पेशे का ख्याल रखना चाहिए, ताकि लोगो मे मन मे ये बात ना पैदा हो कि चिकित्सक धर्म के आधार पर मरीजों का इलाज कर रहे है।



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