हरिद्वार की गूंज
(अमित कश्यप) हरिद्वार। हमारे प्रदेश की मित्र पुलिस अपना काम पूरी जिम्मेदारी से करती है, लेकिन कही कही किसी ना किसी थाने मे किसी भी विवाद  को लेकर प्रथम पक्ष जाता है, और प्रथम पक्ष की उस विवाद मे कोई गलती भी नही होती है, द्वितीय पक्ष द्वारा ही सारी गलती पेश आती है, थोडे समय बाद द्वितीय पक्ष भी वहाँ पहुँच जाता है, तो वहाँ उस समय डयूटी पर तैनात अफसर मजिस्ट्रेट की भूमिका का निर्वहन करने लगते है, कि या तो दोनो पक्ष फैसला कर लो वरना दोनो को जेल भेजूगां कहाँ का इंसाफ है, भाई गलती एक पक्ष करे और जेल दोनो पक्षो को भेजा जायेगा, ये कौन सा इंसाफ है, भाई अब यदि उदाहरण के तौर पर एक बात ली जाये हरिद्वार मे यात्रियों की पिटाई का एक वीडियो वायरल हुआ, उसमे प्रथम गलती यात्रियों की सामने आयी, यात्रियों ने एक दरोगा को पीटा उसके बाद सभी पुलिस वालो ने एक जुटता दिखाते हुए यात्रियों को पीटा तो अब यहाँ पुलिस की ईमानदारी नजर आ रही है, यात्रियों मे से जो  मर्द थे, उन्होंने पुलिस को पीटा लेकिन पुलिस ने औरते तो औरते बच्चो तक को नही छोडा क्या बच्चो ने भी पुलिस अफसर की पिटाई की थी, तो कही ना कही कुछ पुलिस कर्मी भी गलत निर्णय लेते है, ज्वालापुर कोतवाली मे एक मामला 2 माह पहले का है, जिसमे मुरसलीम नामक युवक को मौहल्ले के ही लोगो ने बिना कसूर पिटा जिसमे मुरसलीम कुरैशी कोतवाली ज्वालापुर पहुँचा, वहाँ से पुलिस ने मेडिकल के लिए भेजा चिकित्सीय परीक्षण मे चिकित्सको ने कुछ जाँचे लिखी, जो सरकारी अस्पताल हरिद्वार, रूडकी ,देहरादून मे नही हो पायी, ज्वालापुर कोतवाली के सम्बंधित अधिकारी ये कहते रहे कि अभी मुकदमा दर्ज है, मेडिकल जाँच रिर्पोट ले आओ, धारा बढाकर मुल्जिमान को उठा लेगे, मुरसलीम ने किसी ना किसी तरह एम्स ऋषिकेश मे अपनी जब्डे की जाँच करायी, जिसमे जब्डे की हड्डी टुटी हुई आयी, जाँच कर रहे अधिकारी महोदय को उसकी रिर्पोट दी गयी, तो उस जाँच अधिकारी ने दूसरी पार्टी से मिलकर कहाँ कि तुम लोग मौहल्ले वालो के शपथ पत्र लगवा दो, कि ऐसी को घटना घटित नही हुई है, और जो जब्डा मुरसलीम का टूटा है, वो स्वयं उसने तोडा है, आप भी बताए कोई स्वयं अपना सिर फोड सकता है, हाथ तोड सकता है, पैर तोड सकता है, जबाडे की हड्डी थोडा ही तोड सकता है, उस अधिकारी के कहने पर मुल्जिमान पक्ष ने मौहल्ले के कुछ लोगो के झूठे शपथ पत्र लगवाए, मुरसलीम द्वारा पुलिस पर दबाव बनाने के बाद जाँच किसी और अधिकारी को दी गयी, अब सोचने की बात ये है, जब पूर्व अधिकारी जाँच सही कर रहा था, तो कोतवाल साहब ने जाँच दूसरे को क्यो दी, इसका मतलब साफ है, कही ना कही पूर्व मे जाँच करने वाला अधिकारी गलत या भ्रष्ट है, पैसो के सहारे जीवन जी रहा है, फर्ज के लिए नही, अब दूसरे अधिकारी को जाँच सौपी गयी है, देखते है, कितनी ईमानदारी ये महोदय दिखाते है, साथ ही साथ पूर्व मे लिए झूठे शपथ पत्र देने वालो लोगो की मौबाईल लोकेशन की जाँच होनी चाहिए ताकि पता चले कि इन लोगो ने झूठे शपथ पत्र दिये, घटना के समय ये लोग घटना स्थल पर मौजूद थे या नही,और शपथ पत्र देने वालो लोगो के घर घटना स्थल से कितनी कितनी दूरी पर है, तब जाकर सभी की हकीकत सामने आयेगी।
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