हरिद्वार की गूंज






(गगन शर्मा-उत्तराखंड प्रभारी) हरिद्वार। लगता है जिलाधिकारी दीपक रावत जी का ख़ौफ़ अधिकारियों में खत्म हो गया जो उनके बार बार चेतावनी देने के बावजूद न तो सड़को के गड्ढे ही ऐरा या PWD वाले भरने की कोशिश कर रहे न ही शौचालयो पर से ताले ही हट रहे हैं। आये दिन दैनिक समाचार पत्रों में खबर छपने के बाद और लापरवाह अधिकारियों के कारण सड़क दुघर्टनाओं में अपनी जान गवाने के बावजूद 10 महीनों में अभी तक सड़क बनानी तो दूर उनके गड्ढे भरने में भी अधिकारी रुचि नही ले रहे हैं। उनकी बला से कोई मरे या जीये। हाँ, यदि मोदीजी प्रधानमंत्री का हरिद्वार दौरा बने तो सड़क के गड्ढे क्या सड़क भी रातों रात तैयार हो जायेगी। दूसरी ओर भारत स्वच्छता मिशन को मुँह चिढ़ाते हुए शुलभ शौचालयों के ताले अभी तक नही खोले गए हैं। कनखल में बंगाली हॉस्पिटल के पास तिराहे पर अभी तक ताला लगा हुआ है। जबकि हरिद्वार के दिल सबसे ज्यादा व्यस्त जगह रानीपुर मोड़ पर जनता और पुलिस वाले खुले में शौच करने को विवश हैं। जबकि दीपक रावत द्वारा जिम्मेदार अधिकारियों को कुछ दिन पहले सख्त चेतावनी दी थी। तो क्या जिले के अधिकारी जिलाधिकारी की चेतावनी के आदि बन गये है! जो उनकी सेहत पर कोई असर नही पड़ रहा है। कनखल हाईवे पर जहान्वी डेल होटल के सामने, शंकराचार्य चौक पर महिला मिलन मन्दिर के सामने, चंडी घाट पुल चौराहे ये उन जगहों में से है, जहाँ सड़को के 5 से 6 इंच गहरे गड्ढे किसी बड़ी दुर्घटना को आमंत्रित कर रहे हैं। उत्तराखंड के प्रमुख शहरों में से एक विश्व प्रसिद्ध धर्म नगरी हरिद्वार के विकास से आँख मिचौली खेलने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर जब तक ठोस कार्यवाही नही होगी, हरिद्वार का विकास सम्भव नही।
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