हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ प्रणव पण्ड्या ने कहा कि जिस तरह सूर्य के उदय होते ही सम्पूर्ण जगत में प्रकाश छा जाता है, उसी तरह मनायोगपूर्वक गायत्री साधना करने से साधक के अंतःकरण में भगवत सत्ता के प्रति श्रद्धा, निष्ठा का जागरण होता है। साधकों में सात्विक श्रद्धा जागरण का महापर्व का नाम नवरात्र है। युवा उत्प्रेरक श्रद्धेय डॉ पण्ड्या नवरात्र के दूसरे दिन साधकों को वर्चुअल संदेश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जब साधक मन में उठने वाली समस्त कामनाओं को त्याग देता है या मन से बाहर निकाल देता है और आत्मा के द्वारा आत्मा में ही संतुष्ट रहता है तब वह स्थित प्रज्ञ कहलाता है। उन्होंने कहा कि गायत्री साधना से साधक में सतोगुण की वृद्धि होती है। डॉ पण्ड्या ने कहा कि साधना से विवेक का जागरण होता है। विवेक के जागरण से दुःख, कष्ट मिलने पर मन उद्विग्न नहीं होता और सुख प्राप्त होने पर मन विचलित नहीं होता है। ऐसे साधकों के मन से राग, द्वेष जैसे भाव प्रायः विलुप्त हो जाता है और वह स्थितप्रज्ञ की ओर अग्रसर होता है। स्थितप्रज्ञ व्यक्ति सुख-दुःख में समभाव रहता है। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम सतोगुण, तमोगुण एवं रजोगुण पर विस्तार से जानकारी दी। इससे पूर्व संगीत विभाग द्वारा सुमधुर संगीत प्रस्तुत किये। जो साधक में साधनात्मक मनोभूमि बनाने सहायक हुआ।
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