हरिद्वार की गूंज (24*7)

(नीटू कुमार) हरिद्वार। राष्ट्रीय मानव अधिकार संरक्षण समिति हरिद्वार द्वारा शिक्षक दिवस पर वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का प्रारम्भ आकांशा ने ईश वंदना करके किया, वेबीनार की अध्यक्षता करते हुये ई मधुसूदन आर्य ने कहा कि शिक्षक राष्ट्र के निर्माण में भागीदार होते है और वे देश की संस्कृति को संरक्षण भी प्रदान करते है। वे बालको में सुसंस्कार तो डालते ही है साथ ही अज्ञानता रुपी उनका अन्धकार भी दूर करते है। रोटेरियन राजीव राय ने सभी आगंतुकों का अभिवादन किया। उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार की कुलपति प्रो देवी प्रसाद त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि बतौर कहा कि माता प्रथम गुरु है, क्योंकि जितना माता अपनी संतान को प्रेम करती है और उसकी हितैषी होती है, उतना अन्य कोई नहीं होता है। संतानों को भी माता से सर्वाधिक शिक्षा मिलती है। इस कारण माता प्रथम गुरु है। सांसारिक गुरुओं में माता का स्थान इसलिए सर्वोपरि है, क्योंकि जीवात्मा सबसे प्रथम अपनी माता के उदर में इस संसार में सबसे पहले, सबसे अधिक संगति माता की पाता है। इस कारण माता के आचार, विचार, आहार से सर्वाधिक प्रभावित होता है। माता प्रथम गुरु है, क्योंकि जितना माता अपनी संतान को प्रेम करती है और उसकी हितैषी होती है, उतना अन्य कोई नहीं होता है। संतानों को भी माता से सर्वाधिक शिक्षा मिलती है। इस कारण माता प्रथम गुरु है। प्राचीन काल में गुरु और शिष्य के संबंधों का आधार था गुरु का ज्ञान, मौलिकता और नैतिक बल, उनका शिष्यों के प्रति स्नेह भाव, तथा ज्ञान बांटने का निःस्वार्थ भाव. शिक्षक में होती थी, गुरु के प्रति पूर्ण श्रद्धा, गुरु की क्षमता में पूर्ण विश्वास तथा गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण एवं आज्ञाकारिता. अनुशासन शिष्य का सबसे महत्वपूर्ण गुण माना गया है। गुरुकुल काँगड़ी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ सुनील कुमार ने अति विशिष्ट अतिथि बतौर कहा कि शिक्षा से ही राष्ट्र का निर्माण होता है, विकास होता है, हमारा देश कभी विश्व गुरु था| सभी विद्याओं में अग्रणी, विश्व के अन्य देशों से विद्यार्थी हमारे विख्यात गुरुकुलों तक्षशिला, नालंदा, विक्रमशिला आदि में विद्यार्जन करने आते थे। गुरुकुल में वैदिक कल्चर को बचाकर रखा हुआ है, शिक्षक का छात्र जीवन में अधिक महत्व है। शिक्षक छात्र जीवन में वह व्यक्ति होता है, जो उन्हें अच्छी शिक्षा के साथ बहुत सी अन्य महत्वपूर्ण चीजों को सिखाता है। गुरुकुल के दर्शन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो सोहनपाल सिंह आर्य ने विशिष्ट अतिथि बतौर  कहा कि शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है। शिक्षा न सिर्फ मनुष्य को मानव धर्म का बोध कराती है बल्कि शिक्षा से सामाजिक कुरीतियों का नाश भी होता है। उन्होने कहा कि पिछले डेढ़ साल दर्शन विभाग  सत्यार्थ प्रकाश का निशुल्क अध्यापन कार्य ऑनलाइन माध्यम से कराया जा रहा है, उन्होने कहा जो सत्यार्थ प्रकाश का ज्ञान चाहता है वह निशुल्क ज्ञान प्राप्त कर सकता है। राष्ट्रीय महामंत्री लायन एस०आर गुप्ता ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुये कहा कि महर्षि दयानन्द सरस्वती द्वारा बनाये गये आर्य समाज के दस नियमों के अन्तर्गत विस्तृत कार्य कर रही है जिसमें नियम 06 के अन्तर्गत आने वाले नियम संसार का उपकार करना आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य है। अर्थात् शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना। नियम 09 कहता है कि प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से सन्तुष्ट न रहना चाहिए किन्तु सबकी उन्नति में ही अपनी उन्नति समझनी चाहिए। इन्ही उद्देश्यों पर समिति पूर्ण रूप से कार्य कर रही है। अतिरिक्त महामंत्री कमला जोशी ने कहा कि आज का युग नैतिक मूल्य से भटक रहा है, इन चुनौतियों का सर्वनाश हमारी भारतीय शिक्षण पद्धति गुरुकुल ही कर सकती है। प्राचीन काल से ही हमारी परंपरा को जिवंत रखने का कार्य गुरुकुलों ने ही किया, डॉ मनीषा दीक्षित ने कहा कि वर्तमान में गुरुकुल शिक्षा पद्धति की आवश्यकता है। जिला अध्यक्ष हरिद्वार जितेन्द्र कुमार शर्मा ने कहा कि आर्य वानप्रस्थ आश्रम में महर्षि दयानन्द के आदर्शों पर कार्य किया जाता है। इस अवसर पर पतंजली विश्वविद्यालय के प्रति उपकुलपति प्रो० महावीर अग्रवाल, उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० देवी प्रसाद त्रिपाठी, डा० सुनील कुमार, कुलसचिव, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, प्रो० सोहनपाल सिंह आर्य, दर्शन विभाग, गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार, डा० अशोक कुमार आर्य (अमरोहा), डा० वीणा आर्य (अमरोहा), डॉ० चन्द्र मोहन कंसल, डा० मनमोहन आर्य (हापुड), डा० सीमा गुप्ता (सहारनपुर), डा० मनीषा दीक्षित (ऋषिकुल आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज, हरिद्वार), डॉ० मोना शर्मा (एस.एम.जे.एन, हरिद्वार), श्रीमती साधना रावत कंडारी (हरिद्वार), श्रीमति पूनम मित्तल(पानीपत), श्रीमति प्रीति जोशी (पौढ़ी गढ़वाल), डा० ईरा गुप्ता (शिवालिक नगर), श्रीमती लीना शर्मा, श्रीमती भावना (ऋषिकेश), श्रीमती वर्षा, डा० आकाश अग्रवाल, श्रीमती भावना, श्रीमती वर्षा (ऋषिकेश), डॉ वीरेंद्र गुप्ता आदि को शिक्षा के क्षेत्र में किए गए योगदान व कार्यों के लिए सम्मानित किया गया। वेबिनार में अंकुर गोयल, रेखा नेगी, विकास जैन, डा० अतर सिंह, एडवोकेट गोपाल शर्मा, इं० राममेहर सिंह, इं० एस०एन शर्मा, पंकज कौशिक, हेमन्त सिंह नेगी, शोभा शर्मा, दिलप्रीत, रजत मित्तल, सुनील कुमार, मंगेश शर्मा, लता, शेखर, राखी शर्मा, सत्यवती, विवेक अग्रवाल, रत्नेश गौतम, सुनीता जोशी, नूपुर पाल, नीलम रावत, वेद प्रचारक-शैलेश मुनि आदि उपस्थित रहे। डॉ विमल गर्ग एवं कमला जोशी ने वेबिनार में संयोजक के रूप में कार्य किया।

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