हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में मातृ नवमी के अवसर पर सामूहिक श्राद्ध संस्कार का आयोजन हुआ। श्राद्ध संस्कार कुल पांच पारी में सम्पन्न हुआ, जिसमें सैकड़ों लोगों ने अपने-अपने पितरों, शहीदों व प्राकृतिक आपदाओं में दिवंगत हुए लोगों को भी सामूहिक श्रद्धांजलि दी गयीं। श्राद्ध संस्कार का वैदिक कर्मकाण्ड संस्कार प्रकोष्ठ के आचार्यों ने सम्पन्न कराया। अपने संदेश में अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि मनुष्य के मृत्यु के बाद उसकी आत्मा मरती नहीं है। उसका अपना अस्तित्व बना रहता है। आत्मा अमर, अजर, सत्य और शाश्वत है। जिस प्रकार पुराने, जीर्ण वस्त्र त्याग करके मनुष्य नये वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा जीर्ण शरीर का त्याग करके नया शरीर धारण करती है। कहा कि जब जीवात्मा एक जन्म पूरा करके अपने दूसरे जीवन की ओर उन्मुख होती है, तब जीव की उस स्थिति को भी एक विशेष संस्कार के माध्यम से बाँधा जाता है, जिसे मरणोत्तर संस्कार या श्राद्ध कर्म कहा जाता है। संस्कार विभाग के आचार्यों ने कहा कि पितृपक्ष के प्रत्येक दिन अपने पितरों के अलावा महापुरुषों, संतों, शहीदों, प्राकृतिक आपदाओं में असमय काल कवलित हुई मृतात्माओं की सद्गति एवं कन्या भ्रुण हत्या में जो शिशु आत्माएँ दिवंगत होती हैं, उनके निमित्त विशेष वैदिक कर्मकाण्ड के साथ जलांजलि दी गयी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने अपने-अपने पितरों की याद में एक-एक पौधा रोपने का संकल्प लिया।
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