हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंंज की स्वर्ण जयंती मौके पर आयोजित स्वर्ण जयंती व्याख्यानमाला में नारी सशक्तिकरण विषय आनलाइन संगोष्ठी हुई। संगोष्ठी की मुख्य वक्ता देवभूमि उत्तराखण्ड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य रहीं। अपने आनलाइन संबोधन में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि यह समय इतिहास दोहराने का है। जिस तरह प्राचीन काल में नारियाँ ऋषिकाएँ के रूप में त्याग, सेवा, तप, ज्ञान, संस्कार के रूप में अग्रणी रही। उसी तरह आज की महिलाओं को जगाने, आगे बढ़ाने हेतु प्रोत्साहन सहयोग की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मेरा आदर्श प्राचीन ऋषिकाएँ-अनुसूया, सती सावित्री आदि रहीं हैं। उन्होंने कहा कि नारी को इस तरह सक्षम बनाये जाना चाहिए कि वह किसी भी समस्या-परिस्थिति में झूकें नहीं, वरन् उसके समाधान निकालने के लिए खड़ी हो। नारी सशक्तिकरण ऐसा होनी चाहिए। मुझे बहुत खुशी है कि गायत्री परिवार नारियों के सशक्तिकरण की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य कर रहा है। माननीय राज्यपाल जी ने अपने जीवन की घटनाओं को याद करते हुए गायत्री परिवार के संस्थापक युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा जी के महान कार्यों का उल्लेख किया। इस अवसर पर मौर्य ने एकल परिवार के स्थान पर संयुक्त परिवार की वकालत की। इस अवसर पर देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि इन दिनों एक तरफ जहाँ समाज समस्याओं से जूझता दिखाई दे रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ हिमालयवासी ऋषिसत्ता सृजन के लिए तैयार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि नारकीय पशुतापूर्ण जीवन जीने का मुख्य कारण संवदेना का सूखापन है। इस बीच युगऋषि पूज्य आचार्य के सूत्रों पर चलते हुए अखिल विश्व गायत्री परिवार समाज में भावनात्मक पोषण देने का जो कार्य कर रहा है, उससे अनेकानेक लोगों में संवेदनाएँ जाग रही है, और ऐसे लोग पीड़ित एवं जरूरतमंदों की निःस्वार्थ भाव से सेवा कार्य में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि शांतिकुंज अपनी योजनाओं, कार्यक्रमों में नारियों को प्रमुखता से स्थान देता रहा है। शांंतिकुंज में हवन, संस्कार आदि कराने की जिम्मेदारी भी बहिनें ही संभालती हैं। व्याख्यानमाला के अंत में राष्ट्रीय जोनल समन्वयक डॉ. ओपी शर्मा ने सभी का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों की बहिनें एवं नारी सशक्तिकरण के क्षेत्र में कार्य करने वाले परिजनों ने भाग लिया।
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