हरिद्वार की गूंज (24*7)

(विभास सिन्हा) हरिद्वार। ज्वालापुर कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या पूनम राणा ने प्रेस नोट जारी कहा की 21वीं सदी का भारत आप निर्भरता की तरफ अपने कदम बढ़ा रहा है भारत की उपलब्धियों को पूरा विश्व देख रहा है। हम भारतीय चाहे देश में रहे हो या फिर विदेश में हमने अपनी मेहनत से खुद को साबित किया है हमने अपने संविधान अपनी संस्कृति पर पूरा भरोसा है पूरा गर्व है ।भारत लोकतंत्र की जननी है और आज भी लोकतंत्र को मजबूती देते हुए आगे बढ़ रहा है आत्म निर्भरता से ओतप्रोत हमारी विकास यात्रा पूरी दुनिया की विकास यात्रा को गति देने वाली है करोना कल में यह सारे विश्व के सामने प्रत्यक्ष सिद्ध हो गया है कि आत्मनिर्भर भारत वैक्सीन निर्माण में भी पीछे नहीं रहा। भारत ने न केवल अपनी अपितु विश्व के अनेक देशों की जनता के स्वास्थ्य रक्षा के लिए भरसक प्रयास किया तथा कोरोना वैक्सीन उपलब्ध करवाई। हम सभी का सौभाग्य है कि हम आजाद भारत के इस 70 साल के ऐतिहासिक काल खंड के साक्षी बन रहे हैं जिसमें भारत उन्नति की नई ऊंचाइयां छू रहा है आज का भारत विश्व में अपना नाम अग्रिम पंक्ति में लिख चुका है। आज हर भारतीय के मन में उत्सव है कि हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं महान स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने कहा था स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। हमारे इसी अधिकार के महत्व को समझने वाला आजादी का महत्व भारत का हर नागरिक लोकमान्य तिलक के पूर्ण स्वराज्य आजाद हिंद फौज के दिल्ली चलो और भारत छोड़ो आंदोलन के आवाहन को कभी नहीं भुला सकता। हमें मंगल पांडे, तात्या टोपे, रानी लक्ष्मीबाई, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, पंडित जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल, डॉक्टर अंबेडकर के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। भारत को स्वतंत्र कराने में देश के कोने कोने से कितने ही दलित आदिवासी महिलाएं और युवा है जिन्होंने असंख्य यातनाएं झेली।

आजादी के आंदोलन की इस ज्योति को देश के कोने कोने में निरंतर जागृत करने में हमारे संतो महंतों ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से भूमिका निभाई जब गांधी जी ने दांडी यात्रा की और नमक कानून तोड़ा उस समय नमक यानी उस दौर पर नमक देश की आंख निर्भरता का एक प्रतीक है। महाकवि तुलसीदास का कहना है कि पराधीन सपनेहु सुख नाही इस उक्ति का अर्थ यह है कि पराधीन व्यक्ति कभी भी सुख को अनुभव नहीं कर सकता सुख पराधीन और परावलंबी  लोगों के लिए नहीं बना है पराधीन एक तरह का अभिशाप होता है भले ही आजाद देश पूर्णतया आजाद है। परंतु इस आजादी के लिए हमने बहुत बड़ी कीमत चुकाई है। 1857 की खूनी क्रांति भगत सिंह की शहादत, सुभाष चंद्र बोस की कुर्बानी, महात्मा गांधी के आंदोलन और ऐसे ही असंख्य वीरों की गाथा से इतिहास भरा पड़ा है। स्वतंत्रता सेनानियों की इन्हीं गाथाओं से देशवासियों को प्रेरित करने के उद्देश्य से आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। किसी भी राष्ट्र का भविष्य तभी उज्जवल होगा जब वह अपने अतीत के अनुभवों को सहेज कर अपनी संस्कृति और विरासत को सहेजे हुए विकास हेतु निरंतर प्रयास करता रहता है। हमारे भारत देश के पास भी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर और अतीत के सुनहरे ऐतिहासिक पन्ने हैं देश की इसी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर के प्रति जन-जन को प्रेरित व गौरवान्वित करने हेतु आजादी की 75 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। आजादी के अमृत महोत्सव की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 12 मार्च 2021 के दिन गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती आश्रम से पदयात्रा स्वतंत्रता मार्च को हरी झंडी दिखाकर की गई। इस दौरान आजादी की 75 वीं वर्षगांठ को समर्पित आजादी के अमृत महोत्सव कार्यक्रम का उद्घाटन किया। आजादी का अमृत महोत्सव 15 अगस्त 2022 से 75 सप्ताह पूर्व शुरू हुआ और 15 अगस्त 2023 तक चलेगा। आजादी का अमृत महोत्सव बनाते समय हमें उन देश प्रेमियों को याद करना चाहिए जिन्होंने अपने सारे सुखों को ठोकर मार कर अंग्रेजों से केवल इसलिए लोहा लिया था ताकि दूसरे देशवासी एवं भारतीय सुखचैन और सम्मान के साथ जी सकें। निश्चित रूप से उनके बलिदान रंग लाए परंतु अब हमारा यह कर्तव्य बनता है कि हम देश को इतना सुरक्षित एवं मजबूत बनाएं की कभी कोई विदेशी आकर इसकी ओर आंख उठाकर भी ना देख सके केवल स्वतंत्रता दिवस में ही हमारा कर्तव्य पूरा नहीं हो जाता। हम सभी को अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए और देश हित हेतु तत्पर रहना चाहिए। आजादी का अमृत महोत्सव हम सबको मिलकर मनाना है जन-जन की भागीदारी से आत्मनिर्भर भारत बनाना है।

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