हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(अविनाश गुप्ता) हरिद्वार। हरिद्वार जिले के लक्सर तहसील क्षेत्र में पड़ने वाले विश्व प्रसिद्ध दरगाह कांठा पीर की दरगाह पर बिना अनुमति के मेला लगवाना दो व्यक्तियों को भारी पड़ गया है। दो लोगों पर पथरी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया है। आपको बतादें कि कांठा पीर की दरगाह का मेला जून के महीने में हर्षोल्लास के साथ लगवाया जाता है। जिसमें विश्व के कोने-कोने और देश भर से सभी जाति धर्म के लोगों दरगाह पर आते हैं और अपने व देश में अमन चैन की दुआएं मांगते हैं। लेकिन पिछले वर्ष कोरोनावायरस की वजह से कांठा पीर बाबा की दरगाह का मेला कोविड-19 की गाइडलाइनो के चलते लक्सर तहसील प्रशासन ने स्थगित कर दिया था। और इस वर्ष षड्यंत्र रच कर बिना अनुमति के यह मेला लगाया गया है। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु दरगाह पर पहुंचे और मेले में लगी दुकानों पर जमकर खरीदारी की। यह मेला लगभग 8 दिन चला। लेकिन 8 दिन तक चले मेले की भनक तक लक्सर तहसील प्रशासन को नहीं लगी। जिसका संज्ञान लेते हुए पथरी थाना पुलिस ने मेला लगवाने वाले और कोविड-19 की गाइडलाइनो का उल्लंघन करने वाले जुल्फिकार निवासी बसेड़ी खादर और अदरुद्दीन निवासी सीकरी थाना भोपा जिला मुजफ्फरनगर के विरुद्ध संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आपको यह भी बतादे कि अपने अधिकारों के चलते कई वर्षों से कांठा पीर दरगाह का मामला हाईकोट में विचार दिन है। हाईकोर्ट ने दरगाह पर व्यवस्था करने के लिए तीसरी पार्टी के रूप में लक्सर तहसील प्रशासन को नियुक्त कर रखा है। और दरगाह की देख-देख के लिए दरगाह प्रबंधक पद पर आरिफ रशिद नियुक्त है।
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दरगाह पर होने वाले कार्य, वर्ष में एक बार लगने वाला मेला, मेले की अवधि छोड़कर होने वाले ठेके सभी एसडीएम लक्सर और दरगाह प्रबंधक आरिफ रसीद की रेख देख में होते आए हैं। और हर वर्ष जून महीने में लगने वाला दरगाह का ठेका भी खुली बोली पर लक्सर तहसील प्रशासन की ही देख-देख में होता है। और यह बोली लगभग 25 लाख तक भी बोली गई है। और यह मेला ठेका केवल 5 दिन का तहसील प्रशासन द्वारा कराया जाता है। ठेका कराने के लिए अखबार में विज्ञप्ति दी जाती है। उसी दिनांक में प्रशासनिक अधिकारियों के सामने यह खुली बोली होती है। लेकिन पिछले वर्ष कोरोनावायरस के कारण मेले को सरकार की गाइडलाइनो के अनुसार कैंसिल कर दिया गया था। लेकिन इस बार मेला भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया है। इतना ही नहीं यह मेला षड्यंत्र रच कर सैकड़ों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं की जान जोखिम में डालकर और दरगाह की आमदनी को ठिकाने सीर लगाने के लिए खेला गया है। यह भ्रष्टाचारी का मेला लगभग 8 दिन चला है। अब सोचने वाली यह बात है की 8 दिन तक चले मेले में जो दरगाह पर चढ़ावा लिया गया है। और उस चढ़ावे को हजम किया गया है आखिर उसका जिम्मेदार कौन है। जबकि 5 दिन की अवधि में लगने वाले मेले में दरगाह की आमदनी के लिए लगभग 25 लाख तक बोली लगती है। जिले में बैठे उच्चधिकारी इस ओर गंभीरता से संज्ञान ले और दोनों आरोपियों से मेले की 5 दिन की अवधि में होने वाली दरगाह की आमदनी को रिकवरी के रूप में वापस ले। आपको यह भी बतादें कि क्षेत्र में जगह जगह लोगों में यह चर्चा का विषय भी बना हुआ है कि पुलिस प्रशासन ने दोनों आरोपियों पर मुकदमा दर्ज कर अपने कर्तव्य को, तो निभा लिया है। लेकिन दरगाह के जिम्मेदार लक्सर एसडीएम और प्रबंधक आरिफ रसीद पर अभी तक कोई भी कार्यवाही जिला स्तर से नहीं हुई है। क्योंकि हाईकोर्ट के आदेश पर लक्सर तहसील प्रशासन दरगाह का जिम्मेदार है। दरगाह पर जून में लगने वाले महीने को गंभीरता से क्यों नहीं लिया गया है। मेले की तारीख से पहले जिम्मेदार अधिकारी दरगाह पर क्यों नहीं पहुंचे। आखिर कोरोनावायरस के चलते मेला कैंसिल की सूचना श्रद्धालुओं तक जागरूकता के रूप में क्यों नहीं पहुंचाई गई है। इससे पूर्ण अनुमान लगाया जा सकता है कि कहीं ना कहीं तहसील प्रशासन और दोनों आरोपियों की मिलीभगत से इस मेले को लगाया गया है। षड्यंत्र रच कर अपने फायदे के लिए दरगाह की आमदनी को हड़पने का काम किया गया है। क्योंकि दरगाह प्रबंधक आरिफ रसीद पर कलियर साबिर पाक की दरगाह का चार्ज संभालते हुए भी भ्रष्टाचारी के गंभीर आरोप लग चुके हैं। और यह सवाल उठने जनता के लाजमी भी हैं। क्योंकि कहीं ना कहीं इन सवालों में सच्चाई भी छुपी हुई है। अब देखना होगा कि लक्सर तहसील प्रशासन पर शासन प्रशासन किस तरह की कार्यवाही करते हैं। क्या ईमानदारी से जांच होगी, क्या मेले की 5 दिन की अवधि में होने वाली कई लाखों की आमदनी को रिकवरी के रूप में वापस लिया जाएगा। या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा की शासन प्रशासन में बैठे अधिकारी प्रतिनिधि अपने कर्तव्य के प्रति कितने गंभीर है। क्योंकि प्राप्त जानकारी के अनुसार लक्सर क्षेत्र की जनता का साफ कहना है कि जितने कसूरवार जुल्फिकार और अदरुद्दीन है उससे ज्यादा तहसील प्रशासन है क्योंकि तहसील प्रशासन की मिलीभगत से ही मेला कराना संभव हो सकता है। श्रद्धालुओं की आस्था पर ठेस पहुंचाने वाले इन लोगों से मेले के 5 दिन की अवधि में होने वाली दरगाह पर आमदनी को रिकवरी के रूप में वापस लिया जाए। और जांच करा कर इस भ्रष्टाचार में लिप्त लोगों पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज भी किया जाए।
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