हरिद्वार की गूंज (24*7)

(अविनाश गुप्ता) हरिद्वार। हरिद्वार जिले के पथरी जंगल में स्थिति विश्व प्रसिद्ध दरगाह हजरत शाह मोहम्मद शाह उर्फ काठा पीर के सालाना लगने वाले मेले में कोविड 19 के नियमों की उड़ी धज्जियाँ ओर तो ओर हाईकोर्ट के आदेशों की भी खुलेआम अवेहलना की गई है। जहां कोरोना महामारी के चलते प्रदेश सरकार द्वारा सभी धर्मिक स्थलों पर मेले के आयोजन पर रोक लगाई गई है बावजूद इसके काठे पीर की दरगाह पर दर्जनों दुकानें लगी। जिसमें कोविड 19 के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गई है। बिना अनुमति के लगी दुकानों पर क्षेत्र के ग्रामीणों ने जमकर खरीदारी की। वही दरगाह प्रबंधन और ठेकेदार ने जनता की जान से खिलवाड़ करने के साथ-साथ कम होते कोरोना वायरस के आंकड़ों को ओर पंख लगाए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 8 दिनों से श्रद्धालुओं की आवाजाही दरगाह पर लगी है। मेले की अनुमति ना होने के बाद भी दुकानें लगाई गई। आखिर इसका जिम्मेदार कौन है। दरगाह प्रबंधक या ठेकेदार। वही दरगाह पर बिना अनुमति के बड़ी तादाद में श्रद्धालुओं का जाना, और दुकानें लगनी क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। क्षेत्र में चर्चा है कि दरगाह प्रबंधक से ठेकेदार ने मिलीभगत कर काठे पीर में दुकाने लगवा कर दरगाह को हानी और खुद चादी लूटी गई है। 
आपको बता दे कि दरगाह शाह मोहम्मद शाह उर्फ काठा पीर के खादिमों में दरगाह को लेकर पिछले काफी वर्षों से विवाद हाईकोर्ट में चला आ रहा है। हाईकोर्ट ने दोनों पार्टी को बाहर का रास्ता दिखाकर क्षेत्र के एसडीएम को दरगाह की देखरेख में नियुक्त किया हुआ है। दरगाह पर साल के जून के माह में एक विशाल मेला आयोजित होता है। जिसका लक्सर तहसील प्रशासन द्वारा बोली लगवा ठेका कर दिया जाता है। और ठेके के पैसों को दरगाह के खाते में जमा कराया जाता है वही शेष बचे महीनों का भी तहसील प्रशासन द्वारा ठेका छोड़ा जाता है। वही कोरोना काल में लॉकडाउन के चलते हरिद्वार जिलाधिकारी द्वारा दरगाह पर मेले की कोई अनुमति नहीं है बावजूद इसके दरगाह क्षेत्र में दर्जनों दुकानें लगी। जिनका क्षेत्र में चर्चाओं का विषय बना है कि ठेकेदार ने दरगाह प्रबंधक से सांठगांठ कर मेले के समय दुकाने लगवा कर दरगाह की आमदनी को लूटा है। वही इस बाबत दरगाह प्रबंधक आरिफ रशीद से बात की गई तो उनका कहना है दरगाह क्षेत्र में कोई दुकाने नहीं लगी और ठेकेदार को ठेका दिया हुआ है। उनका कहना है ठेकेदार के पास दरगाह का ठेका 30 जून तक है जिसमें से 5 दिन मेले के अलग हैं और दरगाह पर मेले की भी अनुमति नहीं है। आपको बता दें लगभग 8 दिनों से दरगाह क्षेत्र में दर्जनों से ऊपर दुकानें लगी है दरगाह पर कोई भी सरकारी कर्मचारी नियुक्त नहीं है। वही पूरे मामले को लेकर लक्सर एसडीम शैलेंद्र सिंह नेगी से बात की गई तो उन्होंने तुरंत मामले का संज्ञान लेकर पथरी थाना अध्यक्ष दीपक कठैत को कार्रवाई करने के निर्देश दिए। तत्काल मौके पर पहुंच कर पथरी थाना अध्यक्ष दीपक कठैत ने दर्जनों दुकानदारों के चालान काटे और उन्हें वहा से खदेड़ा गया है। आपको यह भी बता दे कि कई वर्षों से दरगाह प्रबंधक पद पर लक्सर तहसील कर्मचारी आरिफ रशीद नियुक्त है। हालांकि इन वर्षों में आरिफ रसीद के ठेकेदारों से सांठगांठ करने के भी क्षेत्रवासियों ने आरोप लगाए हैं। क्योंकि इन वर्षों में ज्यादा कर एक ही पार्टी ने ठेके के लिए हैं। और यह भी चौंकाने वाली बात है खादिमों की दोनों पार्टियों में से एक ही पार्टी ने ठेके में साझेदारी कर दरगाह पर चढ़ावा लिया है। जबकि कोर्ट में विचारधीन मामलों में विवादित जगह को दोनों पार्टियों को दूर रखा जाता है। दोनों पार्टियों का कोई भी हस्तक्षेप नहीं होता है। क्योंकि विवादित मामलों में झगड़ा होने की भी संभावना अधिकतर होती है विचार दिन मामलों में तीसरी पार्टी को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाती है। कांठा पीर दरगाह कि दोनों पार्टियों के खादिमों की लड़ाई अपने अधिकारों को लेकर है। जिसको देखते हुए लक्सर तहसील प्रशासन को दरगाह की देख देख कर ली नियुक्त किया गया लेकिन लक्सर तहसील प्रशासन इस और गंभीर नहीं है वह भी हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना करता हुआ देखा जा रहा है क्योंकि एक पार्टी लगातार कई वर्षों से दरगाह पर चढ़ा वाले रही है। क्या लक्सर तहसील प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी होने का इंतजार करने में लगा है। क्योंकि दोनों पार्टियों में कई वर्षों से तनातनी होती आ रही है। फिर भी जिले में बैठे उच्चधिकारियों इस ओर गंभीरता से नहीं देखा गया है। अगर बात प्रबंधक आरिफ रसीद की की जाए तो कलियर शरीफ साबिर पाक की दरगाह प्रबंधक के रूप में तैनात रहते हुए आरिफ रसीद पर करोड़ों के भ्रष्टाचार के आरोप लगे है। और भ्रष्टाचार के आरोप लगने के कारण आरिफ रशीद को दरगाह प्रबंधक पद से मुक्त किया गया था। उसके बावजूद भी उच्चधिकारियों ने इस ओर गंभीरता से विचार नहीं किया है। क्योंकि काठा पीर दरगाह प्रबंधक के रूप में कार्य करते हुए आरिफ रशीद ने ठेकेदारों का पक्ष और दरगाह को हानि पहुंचाने का कार्य भी किया गया है।
अगर आरिफ रसीद के दरगाह चार्ज संभालने से लेकर अब तक की ईमानदार अधिकारी से जांच करवाई जाए तो कहीं ना कहीं आरिफ रसीद का रुझान ठेकेदारों की तरफ ज्यादा और दरगाह को हानी पहुंचाने का रुझान सामने निकल कर आएगा। इसका जीता जागता सबूत काठा पीर में लगी दर्जनों दुकानें भी है। जो यह दर्शाती है कि दरगाह प्रबंधक आरिफ रसीद अपने कर्तव्य के प्रति कितने गंभीर हैं आखिरकार लगभग 8 दिनों से लगी दरगाह पर दुकानों का संज्ञान दरगाह प्रबंधक आरिफ रशीद ने क्यों नहीं लिया। जबकि हर साल जून के महीने में मेला लगने की तारीख निर्धारित है। और श्रद्धालुओं के आने के भी आंकड़े लाजमी जताये जाते हैं। बावजूद इसके लक्सर तहसील प्रशासन के किसी भी अधिकारी सरकारी कर्मचारी ने इस ओर संज्ञान नहीं लिया है। क्योंकि उच्च अधिकारियों को गुमराह कर दरगाह प्रबंधक आरिफ रसीद ने ठेकेदार से मिलीभगत कर दरगाह को हानि पहुंचाने का कार्य किया है। अगर दरगाह पर आने वाले श्रद्धालुओं को कोविड-19 की गाइड लाइनों  से जागरूक करने की बात की जाए। तो ना ही लक्सर तहसील प्रशासन ने दरगाह पर कोविड-19 के नियमों से जागरूक करने, दरगाह न खोले जाने की, दरगाह पर दुकाने ना लगाने, कोविड-19 की गाइडलाइन को पालन करने का कोई भी नोटिस सूचना तहसील प्रशासन ने क्षेत्र की जनता को नहीं दी है। जिससे क्षेत्र की जनता लगभग 8 दिन से दरगाह पर लगातार भीड़ के रूप में जा रही थी। सवाल यह भी है की जब दरगाह प्रबंधक आरिफ रसीद ने 5 दिन मेले के छोड़ कर ठेकेदार को अन्य दिनों का ठेका दे रखा है। तो मेले की अवधि के 5 दिन का चढ़ावा किसके द्वारा लिया गया है। जब तहसील प्रशासन के अधिकारियों को ही इसकी सूचना नहीं है तो इन 5 दिनों का चढ़ावा गैरकानूनी तरीके से किसने लिया। किस अधिकारी के साय पर दरगाह की आमदनी को हानि पहुंचाई गई है। यह भी अपने आप में बड़ा सवाल है। जब पिछले साल कोरोना ने अपनी दस्तक दी और इस साल भी कोरोना ने हाहाकार मच आया और लाखों की संख्या में लोगों को मौत के घाट सुलाने का काम किया। तो ठेकेदार को श्रद्धालुओं की जान से खिलवाड़ करने का अधिकार किस अधिकारी की साय पर दिया गया। कोविड-19 में भी ठेकेदार को ठेका क्यों दिया गया। शासन प्रशासन के सख्त आदेश के बाद भी दरगाह पर चिड़ावा लिया गया। जो गैरकानूनी है। अब सवाल यह उठता है कि क्या कोविड-19 की गाइडलाइनो का उल्लंघन करने वाले ठेकेदार और दरगाह प्रबंधक के विरुद्ध मुकदमा दर्ज होगा। क्योंकि प्रशासन ने कोविड-19 की गाइडलाइनो का उल्लंघन करने वाले लोगों पर मुकदमे दर्ज किए हैं साथ ही साथ बड़ी तादाद में चालान भी काटे गए हैं तो सवाल उठने तो लाजमी है। क्योंकि बड़ी तादाद में बिना सोशल डिस्टेंसिंग के बिना मास्क के श्रद्धालु लोग दरगाह पर पहुंचे हैं। बरहाल देखना अब दिलचस्प यह होगा कि लक्सर तहसील प्रशासन लॉकडाउन के चलते बिना अनुमति दरगाह क्षेत्र में लगी दर्जनों दुकानों और उड़ी सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियों व दरगाह पर चांदी लूट रहे ठेकेदार तथा इस पूरे प्रकरण में लिफ्ट अधिकारी कर्मचारियों पर प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा। क्या कोविड-19 की गाइडलइनो का उल्लंघन करने वाले ठेकेदार और दरगाह प्रबंधक आरिफ रसीद पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा। क्या मेले की पांच दिन की अवधि में चढ़ावा लेने वाले के विरुद्ध सख्त कार्रवाई हो पाएगी। क्या इस पूरे प्रकरण पर जांच बिठाई जाएगी। यह भी अपने आप में बड़े सवाल है। जो आने वाला भविष्य ही बताएगा।

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