हरिद्वार की गूंज (24*7)

(रजत चौहान) हरिद्वार। हमारी संस्कृति के अनुसार नारी परिवार और समाज की अस्मिता है तथा हमारी संस्कृति के अनुसार बालिकाओं को देवी का अवतार भी समझा जाता है फिर भी ऐसी कौन सी परिवेश परिस्थितियां हो जाती हैं जिनके वशीभूत होकर बेटियों के साथ इतने बड़े-बड़े अत्याचार हो जाते हैं आज की स्थिति देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि नारी की सुरक्षा पर अब बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह लग चुका है। आए दिन बढ़ते हुए अत्याचार चाहे में किसी अनजान द्वारा किया जाए, या फिर अपने ही परिवार जनों द्वारा उत्पीड़न चाहे शारीरिक या मानसिक देने वाले हमारे ही समाज का अंग होते हैं। आखिर क्यों हो रहे हैं यह  जघन्य अपराध? और क्यों नहीं हो  पा रही इनकी रोकथाम? वीडियो के साथ अन्याय तथा अत्याचार किसी सभ्य समाज की निशानी तो बिल्कुल नहीं हो सकते, घर के बाहर बेटियां सुरक्षित नहीं हैं घर के अंदर यानी अपने ससुराल में भी बेटियों सुरक्षित नहीं है। क्यों एक पिता की हत्या कर दी जाती है? अगर वह अपनी बेटी की अस्मिता के लिए लड़ रहा होता है। और क्यों एक बेटी को आत्महत्या करनी पड़ जाती है? कैसे और क्यों आ जाती है उसके जीवन में इतनी निराशा? यह कुछ ऐसे प्रश्न है जिनका उत्तर हमें इसी समाज में से ढूंढना है। आधुनिक बनने की होड़ कहीं भारी तो नहीं पड़ रही है हम पर? इसलिए हर क्षेत्र में जागरूकता का होना अति आवश्यक है। शिक्षा का उद्देश्य केवल जीवन उपार्जन ही हो गया है, शिक्षा ज्ञान से दूर होती दिख रही है आजकल इसी का परिणाम है कि शिक्षित परिवारों में भी बेटियों के साथ अत्याचार हो रहे हैं। कुछ लोग स्त्री को एक वस्तु की तरह देखते हैं और ऐसे लोग समाज के विकास के लिए सिर्फ अवरोध होते हैं। रिश्तो की गरिमा को भौतिकता से जोड़कर अपराध किए जा रहे हैं। किसी की बेटी पर अत्याचार करते समय अपनी बेटी का भविष्य भूल जाते हैं लोग, मौन रहना सामाजिकता का सबसे बड़ा नियम बनता जा रहा है जब तक खुद को चोट नहीं लगती मौन नहीं टूटता। बेटियों को अब मानसिक तथा शारीरिक रूप से अधिक सक्षम होना है अपनी शक्ति को नव अर्जित करना होगा। अगर समाज में लोगों की मानसिकता को सुधारने का प्रयत्न किया जाए तो शायद महिलाओं की स्थिति को सही नजरिए से समझा जा सकता है। महिला कम से कम महिला होने के नाते एक दूसरी महिला का सम्मान करें सबसे कम से कम किसी महिला के साथ हो रहे अत्याचार में भागीदार ना बने शिक्षा का उपयोग ज्ञानार्जन के लिए तथा अच्छा इंसान बनने के लिए  होना चाहिए। हमारी सम्मानित न्यायपालिका में महिलाओं के हित के लिए अधिकार तो काफी दे दिए गए हैं। पर समाज में महिलाओं की स्थिति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मानसिकता तथा अपने दृष्टिकोण मैं सुधार करना अति आवश्यक है।

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