हरिद्वार की गूंज (24*7)

(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। धार्मिक नगरी व उपनगरी में नशे का कारोबार बंद होने का नाम नहीं ले रहा है। शासन प्रशासन नशे के कारोबार को समाप्त करने मे बोना साबित हो रहा है। इस समय विश्व प्रसिद्ध धर्म नगरी हरिद्वार में कुम्भ मेला शुरू हो गया है। स्नातन धर्म के अनुसार कुम्भ मेले का महत्व हिन्दु समाज में बहुत ही बड़ा है। कुम्भ से करोडों लोगो की आस्था जुडी हुई है। इसके बावजूद कुम्भ मेला शुरू होने पर भी जनपद व आसपास के क्षेत्रों में नशे की सामग्रियां भरपूर मात्रा में उपलब्ध है। समाज व देश का भविष्य यानी युवा पीढी इस तरफ लगातार जा रही है। युवाओं के जीवन में नशा घुस रहा है, और समाज का बुद्धिजीवी, शिक्षित, समाजसेवी वर्ग लगातार इस भयंकर नशा महामारी को बढते हुए देख रहा है। यहां तक कि नशा कारोबारी देश के करोडो लोगो की धार्मिक भावनाओं का भी ख्याल नही रख रहे है यहां तक शासन प्रशासन भी लगातार नशे के कारोबार और नशा कारोबारियो की अनदेखी कर रहा है। इसका साक्ष्य कुम्भ मेला है। कुम्भ मेला शुरू होने के बाद भी नशे के कारोबार में कोई कमी नही आयी है। शासन प्रशासन नशे के कारोबार में लिप्त बड़े लोगो पर कार्यवाही करने से कतरा रहा है। जो समाज व देश के भविष्य के लिए बहुत बड़ा खतरा साबित हो सकता है। हमारी युवा पीढी लगातार नशे की तरफ बढ़ रही है। जिससे युवाओ का भविष्य खराब हो रहा है। शासना प्रशासन को समझना चाहिए की नशे के कारोबार को किसी भी सूरत में बढने नही देना है। तभी जाकर नशे से निजात मिल सकती है और समाज से भी बार बार अपील की जा रही है कि अपने आसपास के नशे की सक्रियता ना होने दे। और नशे का खुलकर विरोध करें। आपके विरोध करने से देश और समाज तथा युवा पीढ़ी का भविष्य उज्जवल हो सकता है। हमारे विरोध से कुछ ना कुछ सुधार आ जाये, वरना नशा कोरोना वायरस से भयंकर वायरस है, क्योंकि कोरोना वायरस से तो इंसान लड़ा भी ले, लेकिन नशा वायरस से इंसानो का लड़ना बहुत ही मुश्किल हो सकता है। आपको बताते चले के लगातार नशे के खिलाफ आवाज बुलंद रखने वाले नवाब भारती समाजसेवी नशा विरोधी कार्यकर्ता एवं एडवोकेट अब्दुल सत्तार सूचनाधिकार सामाजिक कार्यकर्ता ने शासन प्रशासन की कार्य शैली पर अफसोस जाहिर किया तथा समाज के बुद्धिजीवी, समाजसेवी, शिक्षित वर्ग से अपील है कि नशे के खिलाफ आवाज बुलंद करें।

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