हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(रजत चौहान) देहरादून। आजकल उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जल्दी उत्तराखंड में राजनीतिक बदलाव करने जा रहे हैं और वे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के राजनीतिक गुरु महाराष्ट्र के राज्यपाल और पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को उत्तराखंड की कमान सौंपने जा रहे हैं, क्योंकि कोश्यारी के राजनीतिक चेले त्रिवेंद्र सिंह रावत ने तो उत्तराखंड में भाजपा की लुटिया डुबो दी है, भाजपा के राजनीतिक कार्यकर्ता मुख्यमंत्री रावत के व्यवहार से नाराज हैं। इस समय सरकार केवल दो लोग चला रहे हैं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत दोनों ही ठाकुरवाद को राज्य में फैलाने में लगे हैं, इन दोनों के ठाकुर वाद के चलते इन दोनों नेताओं ने राजभवन में बैठी दलित महिला के अधिकारों में ही कटौती कर दी अब तक राज्यपाल को विश्वविद्यालयों के कुलपति बनाने का अधिकार था राज्यपाल बेबी रानी मौर्य अपने मधुर व्यवहार के कारण जनता में बहुत लोकप्रिय हो रही है साधु संतों और आम जनता में उनकी अच्छी पकड़ है वह कुलपति रहते हुए जातिवाद से ऊपर उठकर ईमानदारी के साथ उच्च शिक्षाविदो को ही कुलपति नियुक्त कर रही थी जो मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत को रास नहीं आ रहा था क्योंकि वह हर कुलपति की सीट पर अपनी जाति के ठाकुर लोगों को बैठाना चाहते थे उच्च शिक्षा में अंब्रेला एक्ट के नाम पर मुख्यमंत्री रावत और उच्च शिक्षा मंत्री धनसिंह रावत की जोड़ी ने राज्यपाल के कुलपति नियुक्त करने के अधिकारों में कटौती कर दी, राज्यपाल ने उनके अध्यादेश को दो बार लागू करने से इनकार किया इस समय राजभवन और मुख्यमंत्री आवास में रेखाएं खींची हुई है राजभवन और मुख्यमंत्री आवास की चारदीवारी एक साथ मिली हुई है, परंतु राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच दूरियां विकट बनी हुई है, राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने जब देखा कि चमोली में आपदा ग्रस्त क्षेत्रों में आपदा कार्यों में लापरवाही बरती जा रही है तो वे सीधे आपदा ग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने गई तो उनके सामने लोगों का गुस्सा फूटा और लोगों ने अपनी आपबीती बताई उसके बाद महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी आपदा पीड़ितों का हालचाल जानने के लिए मुंबई से सीधे चमोली आए जनता ने उन्हें भी अपनी आपबीती सुनाई सूत्रों का कहना है कि खुफिया एजेंसियों ने केंद्र सरकार को जो उत्तराखंड के राजनीतिक हालातों की रिपोर्ट दी है वह चौंकाने वाली है इस रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में यदि त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में चुनाव हुए तो भाजपा की हालत 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस जैसी हो जाएगी यानी भाजपा को 2022 के चुनाव में त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में चुनाव लड़ने पर एक दर्जन सीटें भी नहीं मिलेंगी कुमाऊं के पर्वतीय जिलों और मैदानी जिलों उधम सिंह नगर के अलावा गढ़वाल के पर्वतीय जिलों चमोली उत्तरकाशी टिहरी रुद्रप्रयाग पौड़ी जिलों के अलावा देहरादून जिले में भाजपा का सफाया होना तय है इसके अलावा हरिद्वार में भी भाजपा को 2017 के मुकाबले बहुत नुकसान होने वाला है उत्तराखंड में आजकल नौकरशाही भी दो भागों में बैठी हुई है पहाड़ी और मैदानी में पहाड़ के अधिकारियों की लॉबी बिहारी और हरियाणवी और अन्य मैदानी अधिकारियों के त्रिवेंद्र सिंह रावत के समय शासन में हावी होने से बेहद रुष्ट है जिसका प्रभाव उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में पड़ रहा है वही किसान आंदोलन का प्रभाव हरिद्वार उधमसिंह नगर और नैनीताल जिले के मैदानी क्षेत्रों में व्यापक रूप से है वहीं मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की डोईवाला सीट भी सिख आबादी के होने से खतरे में नजर आ रही है 2017 में सिख समुदाय ने डटकर भाजपा को वोट दिया था वेयर भाजपा के खिलाफ है राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि 2017 में जो हाल कांग्रेस के हरीश रावत ने मुख्यमंत्री रहते हुए कांग्रेस का किया था और कांग्रेस 11 सीटों पर सिमट गई थी और मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत 2 विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़े और हार गए अब यही हाल भाजपा सरकार के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत के नेतृत्व में भाजपा का होने वाला है मुख्यमंत्री की अपनी सीट डोईवाला सुरक्षित नहीं है वे रायपुर से चुनाव लड़ना चाहते हैं जहां पर कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए उमेश शर्मा काऊ विधायक हैं जो विजय बहुगुणा के खास हैं काऊ और मुख्यमंत्री में पटरी नहीं बैठती है लोग बाग़ कहते हैं कि जो हाल कांग्रेस का एक रावत ने किया वही हाल भाजपा का दूसरा रावत करेगा यह सब रिपोर्ट भाजपा हाईकमान के पास है इसलिए भाजपा हाईकमान ने तय किया है कि जल्दी ही उत्तराखंड की बागडोर उत्तराखंड के सबसे लोकप्रिय जनप्रिय मधुर वासी मिलनसार और उत्तराखंड राज्य की जनता की नब्ज पहचानने वाले सबसे अधिक ईमानदार राजनेता भगत सिंह कोश्यारी यानि भगत दा को सौंप दी जाए तो वे भाजपा की नाव को खींच कर ले जाएंगे और 2022 में भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार राज्य में बन जाएगी वरना त्रिवेंद्र सिंह रावत तो भाजपा की लुटिया डुबो देंगे जो त्रिवेंद्र सिंह रावत मुख्यमंत्री बनने के बाद भ्रष्टाचार को मिटाने की बात करते थे उनके राज्य में राज्य के प्रमुख पदों पर ऐसे अधिकारी बैठे हैं जो गले गले तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं और वही शासन और सरकार चला रहे हैं भाजपा के कार्यकर्ता भी त्रिवेंद्र सिंह रावत को जमकर कोसते हैं कोश्यारी के मुख्यमंत्री बनने से राज्य में भाजपा में ऊर्जा का संचार होगा और भाजपा कार्यकर्ताओं का मनोबल और उत्साह सातवें आसमान में पहुंचेगा दलित राज्यपाल के अधिकारों में कटौती करने से उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत की जोड़ी से राज्य का दलित वर्ग भी बहुत नाराज है जो भाजपा से खिसक गया है इसके अलावा ब्राह्मण पिछड़े सिख पंजाबी सब त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार्यशैली से नाराज हैं राज्य में चार धाम धार्मिक न्यास बनाकर मुख्यमंत्री ने ब्राह्मणों को नाराज कर दिया है अपने मंत्रिमंडल में किसी भी पिछड़े और पंजाबी को त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शामिल नहीं किया है कुमाऊं के कद्दावर नेता रहे प्रकाश पंत के निधन के बाद कुमाऊ से भी किसी ब्राह्मण नेता को मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया गया है इसीलिए मुख्यमंत्री का मंत्रिमंडल भी इस समय असंतुलित है मुख्यमंत्री ने दो तीन बार मंत्रिमंडल विस्तार की बात कही दिल्ली भी हाईकमान के सामने मत्था टेका परंतु हाईकमान ने उन्हें उनके जातिवादी दृष्टिकोण के कारण मंत्रिमंडल विस्तार की अनुमति नहीं दी राजनीतिक हलकों में यह चर्चा है कि भगत सिंह कोश्यारी को मुख्यमंत्री बनाने के बाद ही उनके मंत्रिमंडल में सभी सीटें भरी जाएंगी और जातीय और क्षेत्रीय संतुलन कायम किया जाएगा इसी उधेड़बुन में आजकल पार्टी हाईकमान लगा हुआ है उत्तराखंड के बजट सत्र के बाद राज्य राजनीतिक उलटफेर होगा।



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