हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(गगन शर्मा) हरिद्वार। आम जनता के साथ संवाद के बिना सरकारी अधिकारी मोटी मोटी सैलरी तो आसानी से पा सकता है मगर सही गुणवत्ता की समाज को सेवा देना सम्भव नही। कल्पना कीजिए जिस समय चमोली जनपद के ऋषि गंगा पॉवर डैम पर वो जल का जब शैलाब आता देखकर वहाँ के स्थानीय जागरूक आम जनता ने फेसबुक वीडियो कॉलिंग के माध्यम से नीचे रहने वाले लोगो को खतरे से चेताया यदि ठीक उस समय उस मोबाइल के नेटवर्क सही न होते तो क्या इतने बड़े शैलाब के खतरे को विभिन्न जनपदों के जिला प्रशासन या राज्य सरकार उस खतरे को नियंत्रित कर पाती! पिछले कुछ समय से जब से हरिद्वार के मेलाधिकारी दीपक रावत ने जिलाधिकारी पद छोड़ा है, हरिद्वार प्रशासन के अधिकांश अधिकारी आम जनता के फोन उठाने से बचने का प्रयास करते है। एक अधिकारी तो रात को अपने स्टाफ से टेलीफोन के माध्यम से फिर उनके पास दिनभर आने वाली कॉल करने वालो से पूछते है कि दिन में आपने साहब को कॉल क्यो थी। मगर तब तक तो बहुत देर हो सकती है यदि सुरक्षा या किसी आवश्यक कार्य के लिये अधिकारी को सूचित करना हो। हरिद्वार के लोक निर्माण विभाग के अधिकारी को भी फोन उठाने से बचते देखे गए है। इस विषय मे मेलाधिकारी दीपक रावत और उप मेलाधिकारी हरबीर सिंह आदर्श है वो आम जनता के साथ निरन्तर स्वयं संपर्क में रहते हैं। उनके पास आने वाली प्रत्येक कॉल का सम्मान कर कॉल करने वाले को सदैव उचित जानकारी देते हैं। इसके अतिरिक्त आम जनता मोबाइल नेटवर्क से बहुत ज्यादा पीड़ित हैं। मोबाइल नेटवर्क कम्पनियों ने अपने शुल्क तो बढ़ा दिए मगर आम जनता को पर्याप्त गुणवत्ता वाली सुविधा (सिग्नल) के लिये दिन भर संघर्ष करने को विवश हैं। दो मोबाइल कम्पनीया आपस मे मिली मगर उनके उपभोक्ताओं को इसके बाद अच्छी सुविधाये मिलने के उन्हें और भी ज्यादा नेटवर्क प्रॉब्लम से दिनभर जूझना पड़ रहा है। यही नेटवर्क की समस्या यदि उस समय चमोली के ऋषि गंगा पॉवर प्रोजेक्ट के स्थान पर हुई होती तो परिणाम उत्तराखंड में बुरे होते। मोबाइल नेटवर्क कम्पनी हो या किसी भी जनपद के अधिकारी उन्हें ये समझते हुवे की जनता से समय समय पर संवाद और जनता को बेहतर नेटवर्क की सुविधा देना उनका न सिर्फ फर्ज है बल्कि जनता का अधिकार है।
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