हरिद्वार की गूंज (24*7)
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(राव ज़ुबैर पुंडरी) उत्तर प्रदेश। जिला फर्रूखाबाद के मिनी कुंभ पांचाल घाट मेला राम नगरिया में चल रही पाक्षिक राम कथा में छठें दिवस असलापुर धाम से पधारे कथावाचक अनूप ठाकुर महाराज ने अनुरागी भक्त केवट के बारे में कहा कि केवट के जीवन में भगवान राम के प्रति अपार अनुराग है, उसी अनुराग की वजह से खुद भगवान भक्त केवट के ऊपर कृपा करने के लिए जाते हैं कि तुलसीदास बाबा ने रामचरितमानस में लिखा है। अति आन्नद उमगि अनुरागा अर्थात उसके जीवन में त्याग है। जब भगवान नाव में चढ़ने को होते हैं, तब केवट कहता है कि मै आपका सब मरम जानता हूं इस पर श्रीराम कहते तू मेरा कौन सा मरम जानता है। केवट कहता है कि आपके चरण स्पर्श मात्र से ही पत्थर नारी अहिल्या के रूप में बदल गयी छुअति सिला भयी नारी सुहाई पाहन ते न काठ कठिनाई अगर आपने मेरी नाव पर अपने चरण रख दिए तो ये भी परिवर्तित हो जाएगी। मेरी जीविका का केवल यही एक साधन है। तब लक्ष्मण बोले केवट मेरे भैया को केवल दशरथ नंदन समझने की भूल मत करना। वे स्वयं ब्रह्म हैं कि केवट जानता था। कि वे स्वयं परमात्मा हैं, इसीलिए उसने चरण धोने की शर्त रखी। केवट चरण धोने के बाद भगवान राम, माता सीता व भाई लक्षमण को पार ले जाता है। पार पहुंचाने के बाद केवट भगवान से प्रार्थना करता है कि जिस तरह से आज उसने उन्हें नदी पार कराई है। उसे भी भवसागर से पार कराना। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रोता मौजूद रहें।
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