हरिद्वार की गूंज (24*7)

(यतेंद्र कुमार) हरिद्वार। जहां पुलिस लोगो की जान बचाने के लिए सड़कों पर उतर कर लोगो को यातायात नियमों के संबंध में बताती है, और सड़क दुघर्टना न हो इस बारे में हरिद्वार पुलिस द्वारा सड़क सप्ताह अभियान भी चलाया गया है, और लोगो को हेल्मेट के प्रति समय-समय पर अवगत भी कराया गया है। इस को देखते हुए हरिद्वार धर्मनगरी में सी०पी०यू पुलिस का भी गठन किया गया, और सी०पी०यू पुलिस द्वारा हेल्मेट से लेकर नंबर प्लेट, गाड़ी के कागज व चैंकिग की जाती है। कई बार तो सी०पी०यू पुलिस ने अवैध तरीके से शराब ले जाने वाले तस्करो को भी पकड़ा है, ओर उनके हौसलों को पस्त कर दिया। कहते हैं पुलिस भी भगवान का अवतार होती है, कई बार देखा गया है कि पहाड़ी क्षेत्र की बात हो, या शहरी क्षेत्र की पुलिस हमेशा लोगो के लिए यमदूत बनकर सामने आई है और लोगो की जान बचाई है। हरिद्वार धर्मनगरी में सी०पी०यू पुलिस तो अपनी ड्यूटी को बड़ी ईमानदारी से निभा रही है, ओर लोगो की जान भी बचा रही है, पर हरिद्वार क्षेत्रान्तर्गत बी०एच०ई०एल रोड पर बनी केशवकुंज चौकी कही जाने वाली अब सी०पी०यू कार्यालय बना हुआ है। जहां शाम ढलते ही सन्नटे के साथ साथ जंगली जानवरों का भी आना जाना शुरू हो जाता है। अब सोचने की बात यह है कि पुलिस की शिफ्ट भी 12-12 घण्टे की होती है और रात के समय उस रास्ते से निकलना खतरे से कम नही, कई बार सी०पी०यू कार्यालय में हाथी से लेकर तेदुंआ भी देखा जा चुका है। और दूर-दूर तक न तो वहां लाइट का समाधान है न ही खाने पीने की व्यवस्था है, ऐसे में पुलिस आलाधिकारियों को सोचना चाहिए जहां पुलिस लोगो की जान बचाने के प्रयास करती है वहीं सी०पी०यू का कार्यालय किसी खतरे से कम नही। ऊपर से अगर रात के समय कोई जंगली जानवर दिख जाता है तो आप टू व्हीलर वाहन भी तेजी से दौड़ा नही सकते। ऐसे में आप साफ अंदाजा लगा सकते है शाम ढलने के बाद उस रास्ते मे सन्नटा पसर जाता है और जान खतरे में होती हैं। इस ओर पुलिस आलाधिकारियों को जल्द से जल्द सोचना चाहिए, क्योकि जानवरों को नही पता होता सड़क पर चलने वाला व्यक्ति पत्रकार है, डॉक्टर है, आम आदमी हैं य पुलिस वाला है। आप सब ने एक कहावत तो सुनी होगी यह रास्ता है सुहाना, यहां कल क्या हो किसने जाना।

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