हरिद्वार की गूंज (24*7)

(विभास सिन्हा) हरिद्वार। जिंदगी में उत्साह, आनन्द एवं रोमांच की सभी को जरूरत होती है। यह उत्साह एवं रोमांच ही जीवन की राह को सरल एवं सार्थक बनाता है। यदि घर-परिवार मे समृद्वि तथा अनुशासन बना रहे तब यही आनन्द एवं उत्साह दोगुना बढ जाता है। लेकिन आज का परिवेश उत्साह, आनन्द एवं रोमांच को एक अलग मापदण्ड से देखता है। उसकी नजर में भौतिक संसाधनों की उपलब्धता एवं खर्च करने के लिए असीमित धन का होना एकमात्र आनन्द एवं रोमांच का साधन है। भौतिक संसाधनों की उपलब्धता होने पर भी व्यक्ति कितना सुखी है यह जानने के लिए किसी प्रमाण की जरूरत नही है। वर्तमान स्थितियाॅ इसका जीवन्त उदाहरण है। 

शिक्षा नीति के ब्रांड अम्बेसडर डाॅ० शिवकुमार चौहान कहते है कि आज व्यक्ति को सबसे ज्यादा आध्यातमिक एवं मानसिक सुख की ज्यादा आवश्यकता है। इन दोनो स्थितियों के लिए जीवन मे तथा घर-परिवार मे अनुशासित व्यवहार एवं वैचारिक समृद्वि का होना आवश्यक है। घर के माहौल को अनुशासित बनाने मे घर की बेटियों की महति जिम्मेदारी है। 11 अक्टूबर विश्व बालिका दिवस के अवसर पर उनका कहना है कि सभी परिवार मे एक बेटी का होना बहुत जरूरी है। बेटियाॅ परिवार के सभी सदस्यों के प्रति संवेदनाएं रखती है। घर मे उनके रहने से अनुशासन एवं समृद्वि बनी रहती है। घर मे त्योहार तथा खुशी के पल को बेटियाॅ अपने उत्साह एवं उपस्थिति से दुगना कर देती है। जबकि दुखः के क्षणों में यही बेटियाॅ अपनी शीतल छाया से दुखः के प्रभाव को कम कर देती है। अर्थात दोनो ही अवसरों में बेटियों का होना व्यक्ति के लिए आनन्द को बनाये रखता है। डाॅ० चौहान का मानना है कि समाज मे बेटियों के अस्तित्व को लेकर वातावरण बदला है, जो चिन्ता का विषय है। इस बदले वातावरण मे बेटियों की सुरक्षा एवं सम्मान की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। भावनाओं एवं उददेश्य विशेष को लेकर ही शायद ऐसे दिवसों को याद किया जाता है। अनुशासित एवं समृद्वशाली जीवन के लिए घरों मे बेटियों का होना आवश्यक है। आओं इस दिवस पर बेटियों के अनुकूल समाज में वातावरण तैयार करने की अपनी जिम्मेदारी के निर्वहन का प्रण ले। यही हम सभी की समृद्वि का एकमात्र रास्ता है।

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