हरिद्वार की गूंज (24*7)

(गगन शर्मा) हरिद्वार। पिछले तीन दशकों में जीवन के हर क्षेत्र में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी सेवाओं का काफी विस्तार हुआ है। शिक्षा क्षेत्र भी इसका अपवाद नहीं है। प्राचीन गुरुकुल तथा आश्रम की वाचिक परंपरा से होते हुए शिक्षा ने अनेक सोपान तय किये हैं। पिछली सदी के कमोबेश पारंपरिक श्यामपट तथा खड़िया मिट्टी (चाॅक) के दौर से गुजरते हुए इक्कीसवीं सदी के इस दूसरे दशक में पठन-पाठन का समूचा परिदृश्य बहुत बदल चुका है। आज की स्कूली शिक्षा नवयुगीन साधनों तथा युक्तियों से सुसज्जित होती जा रही है। साधारण ब्लैकबोर्ड की जगह स्मार्टबोर्ड ने ले ली है तथा विविध प्रकार के मार्कर पेन ने खड़िया मिट्टी (चाॅक) का स्थान ले लिया है। इंगित करने के लिये इस्तेमाल होने वाली स्टिक का स्थान लेज़र पॉइंटर ने ले लिया है। स्लाइड प्रोजेक्टर तथा एलसीडी प्रोजेक्टर अब हर कक्षा की अनिवार्य आवश्यकता बनते जा रहे हैं। शिक्षा में दृश्यश्रव्य प्रणाली का प्रचलन उत्तरोत्तर बढ़ता जा रहा है। सुगम तथा बेहतर प्रस्तुतिकरण के लिये टच स्क्रीन वाले बोर्ड अब स्कूलों में इस्तेमाल किये जा रहे हैं। शिक्षण प्रणाली के तौर-तरीकों में बहुत तेज़ी से बदलाव हो रहा है। COVID-19 महामारी के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिये लागू किये गए, लॉकडाउन के कारण स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय की शिक्षा प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो रही है। परिणामस्वरूप शिक्षा अब तेज़ी से ई-शिक्षा की ओर अग्रसर हो रही है। इस आलेख में ई-शिक्षा की बढ़ती भूमिका, उसकी विशेषताएँ तथा इस क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों पर विमर्श किया गया है। इस वक्त कोरोनावायरस के कारण बच्चों की ऑनलाइन क्लासेस चल रही है जिससे कि बच्चों की पढ़ाई पर निरंतर चलती रहे और कोरोना से बचाव के लिए नियम का पालन भी किया जाए और बच्चों की पढ़ाई भी न छुटे। ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से बच्चों के साथ-साथ उनके माता-पिता भी ऑनलाइन क्लासेस से जुड़ रहे हैं, वहीं बच्चों को भी ऑनलाइन क्लासेस में मजा आने लगा है। उन्हें टीचर्स द्वारा प्रोजेक्ट भी दिए जा रहे, साथ ही उन्हें रचनात्मक कार्यों से भी जोड़ा जा रहा है। क्लासेस आप अपने घर पर ही ले रहे हैं जिससे हम खुद अनुशासन में रहना सीख रहे हैं। बच्चों को कोचिंग के लिए नहीं जाना पड़ रहा है व आने-जाने का समय बच रहा है। ऑनलाइन क्लासेस से बच्चों को थकान नहीं हो रही व घर पर ही बच्चे पढ़ाई कर पा रहे हैं। बच्चे एकांत में आराम से पढ़ सकते हैं। जब आपका मूड हो, जब मन करे तब आप क्लास को डाउनलोड करके देख सकते हैं अपने समयानुसार। बच्चे पूरे समय अपने माता-पिता के सामने रहते हैं व सुरक्षा की दृष्टि से भी यह फायदेमंद है ।लेकिन हर चीज के 2 पहलू होते हैं। ये ऑनलाइन क्लासेस जहां बच्चों के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं, तो वहीं इसके कुछ नुकसान भी सामने आ रहे हैं। ऑनलाइन क्लासेस में क्लासरूम की तरह पढ़ाई संभव नहीं है और अपने डाउट्स क्लीयर जैसे क्लासरूम में करते थे, वैसे ऑनलाइन क्लासेस में होना मुश्किल है। वहीं कई बार ऐसा भी होता है कि मैडम क्या कह रही हैं, ये सुनने की जगह मोबाइल में गेम की ओर ध्यान जाता है। ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे पढ़ जरूर रहे हैं, पर उन्हें जैसा ज्ञान प्राप्त होना चाहिए, वैसा नहीं मिल रहा है। हर बच्चे पर पूरी तरह से फोकस नहीं किया जा रहा है। लगातार मोबाइल के इस्तेमाल से बच्चे इसके आदी हो रहे हैं और अकेले रहने की प्रवृत्ति यानी अकेला रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। लंबे समय तक मोबाइल के इस्तेमाल से उनकी आंखों पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही बच्चे काफी चिड़चिड़ापन भी महसूस करते हैं। ऑनलाइन क्लासेस में इंटरनेट कनेक्टिविटी जैसी समस्या का सामना भी करना पड़ता है। ऑनलाइन क्लासेस में थ्योरी पढ़ने में इतनी समस्या नहीं आती है जितनी प्रैक्टिकल सब्जेक्ट में परेशानी आती है। वो समझने में दिक्कत होती है। मेरे विचार से ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे पढ़ जरूर रहे हैं, पर उन्हें जैसा ज्ञान प्राप्त होना चाहिए, वैसा नहीं मिल रहा है। टीचर्स द्वारा बच्चों को ज्ञान देने के लिये हर समभाव प्रयास किये जा रहे हैं ।

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