हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। शहीद-ए-आजम भगत सिंह की आज जयंती है। अपनी सोच और मजबूत इरादों से अंग्रेजी हुकूमत को हिला देने वाले इस नौजवान क्रांतिकारी को आज पूरा देश याद कर रहा है। अंग्रेजी हुकूमत से देश को आजाद करने के लिए चले आंदोलनों में भगत सिंह का नाम बहुत ही गर्व से लिया जाता है। 12 साल की उम्र में जलियांवाला बाग कांड का उनके मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव पड़ा था। जिस कारण 14 साल के भगत सिंह ने सरकारी स्कूलों में किताबें और कपड़ों में आग लगा दी थी। देश की रक्षा के खातिर अपनी पढ़ाई छोड़कर सन् 1920 में वे महात्मा गांधी के अहिंसा आंदोलन में शामिल हुए। और मार्क्स के विचारों से बेहद प्रभावित भगत सिंह ने इंकलाब जिंदाबाद का नारा दिया था, इसका मतलब है कि क्रांति की जय हो। उस समय इस नारे ने न जाने कितने युवाओं में जोश भरने का काम किया था। स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ ही भगत सिंह एक अच्छे लेखक और वक्ता भी माने जाते हैं। जेल में रहने के बावजूद भी अपने क्रांतिकारी विचारों को वे लेख के माध्यम से अपने दोस्तों तक पहुंचाते थे। और 23 साल की छोटी सी उम्र में ही ब्रिटिश सेना द्वारा उन्हेंं फांसी पर चढ़ा दिया गया था। वहीं ब्राह्मण समाज के वरिष्ठ समाजसेवी गौरव कौशिक ने समस्त देशवासियों को शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश में क्रांति लाने के मजबूत इरादों से अंग्रेजों के शासन को झकझोर कर रख देने वाले क्रांतिकारी नौजवान भगत सिंह ने अपने प्राणों की हंसते हंसते आहुति देकर देश को आजाद कराया थी। उनकी शहादत को युगो युगो तक याद किया जाएगा। उन्होंने कहा कि उनके पद चिन्हों और विचारों पर चलना ही सच्ची देशभक्ति है। जिससे हमारे देश की उन्नति में एक नई उर्जा उत्पन्न होने के साथ-साथ आपसी भाईचारा प्रेम भाव भी बढ़ेगा।



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