हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। चेयरमैन कार्तिक कुमार ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि हमारे भारतवर्ष भारत रतन एक हीरा इस दुनिया से जा चुका है, राजनीति के विद्वान कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी एक साधारण और सरलता के धनी के माने जाते थे कांग्रेस पार्टी को कई जगहों पर गिरते हुए संभाला है। साल 1985 और अगस्त 2000 से जून 2010 तक प्रणब मुखर्जी पश्चिम बंगाल कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रहे। उन्होंने जून 1991 से 196 तक तब के 'योजना आयोग' जो अब 'नीति आयोग' के नाम से जाना जाता है के डेप्युटी चेयरमैन रहे। वह 1993 में चौथी बार राज्यसभा के सदस्य बने। फरवरी 1995 से से मई 1996 तक वह भारत के विदेशी मंत्री रहे। कार्तिक कुमार चेयरमैन ने कहा की राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की भूमिका हमारे देश में राजनीतिक कर्तव्यों में बड़ी ही अहम रही है हम इस योगदान को कभी भुला नहीं सकते। विदेश मंत्रालय से लेकर वित्त मंत्रालय तक प्रणब मुखर्जी ने संभाला है, प्रणब का 25 अक्टूबर 2006 से 23 मई 2009 तक भारत के विदेश मंत्री रहे। 24 जनवरी 2009 से मई 2012 तक वह देश के वित्त मंत्री भी रहे। 20 मई 2009 को वह जंगीपुर संसदीय सीट से ही 15वीं लोकसभा के लिए दूसरी बार चुने गए। प्रणब दा ने 25 जून 2012 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया और 2012 से 2017 तक भारत के 13वीं राष्ट्रपति रहे। इस प्रकार राष्ट्रपति बनने के साथ ही प्रणब दा का लगभग 45 वर्ष लंबे राजनीतिक करियर पर विराम लगा जिससे हमें प्रेरणा लेनी चाहिए।



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