हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। डाॅ. शिवकुमार चौहान असिस्टेंट प्रोफेसर गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय ने बताया कि उत्तराखंड देश का ऐसा राज्य है जहां हिमालय का प्राकृतिक वातावरण प्रकृति के अनुपम एवं अदभुत सौन्दर्य को बया करता है वही बर्फ से आच्छादित ऊॅची-ऊॅची पर्वत श्रृंखलाए मन को एकाएक ही हर्षित एवं आनन्दित करती है। इसके एक ओर उत्तर में चाईना का स्वायत्त बोर्डर तथा दूसरी ओर पूर्व में नेपाल का सुदूर पश्चिम क्षेत्र, दक्षिण में उत्तर प्रदेश तथा पश्चिम में पहाडी राज्य हिमाचल प्रदेश स्थित है। इस प्रदेश की चारो ओर से भागौलिक स्थिति भी इसकी सुन्दरता एवं रमणीयता का एक अनूठा संगम है। यहां आकर ऐसा लगता है। मानो प्रकृति ने अपना सम्पूर्ण सौन्दर्य एवं अथाह सम्पदा इसी प्रदेश को प्रदान की है। उत्तराखंड में भारत का सर्वोत्तम पर्वतारोहण संस्थान नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी में स्थित है। जिसे एशिया का पर्वतारोहण संस्थान का दर्जा भी हासिल है। भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 14 नवम्बर 1965 को इस संस्थान की स्थापना की थी। उन्ही के नाम पर इसे नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के नाम से जाना जाता है। यह संस्थान विश्व का एकमात्र संस्थान है जिसे इन्टरनेशनल फेडरेशन ऑफ कलाईमबिंग एण्ड माउन्टनेयरिंग द्वारा मान्यता प्राप्त है। गुरदयाल सिंह भारत के ऐसे पहले पर्वतारोही हुए है जिन्हें पर्वतारोहण के लिए सर्वप्रथम सन् 1965 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया। जबकि महिलाओं में सर्वप्रथम बच्छेन्द्रीपाल को सन् 1984 में सर्वश्रेष्ठ पर्वतारोही का गोल्ड मेडल इण्डियन माउन्टनेयरिंग फाउन्डेशन द्वारा तथा भारत का सर्वश्रेष्ठ चैथा सीविलियन पदम श्री अवार्ड प्रदान किया गया। उत्तराखंड की बच्छेन्द्रीपाल सहित 6 महिलाओं को पर्वतारोहण मे सम्मानित किया जा चुका है। जिनमे लखनऊ की रहने वाली अरूणिमा सिन्हा को एक वर्ष पूर्व पदम श्री, झारखंड की रहने वाली प्रेमलता अग्रवाल को वर्ष 2013 में पदम श्री, तेलंगाना की मालावत पुरना को वर्ष 2000 में, हरियाण की रहने वाली दो जुडवा बहने तांशी और नुंन्गशी को तथा दो बार माउन्ट एवरेस्ट फतह करने वाली संतोष यादव को वर्ष 2000 मे पदम श्री से सम्मानित किया जा चुका है। आज 4 अगस्त को राष्ट्रीय पर्वतारोहण दिवस के अवसर पर देश की उन तमाम महिलाओं को नमन करने का दिन है जिन्होंने अपने सामथ्र्य एवं मजबूत इरादें से पर्वत रोहण जैसे मुश्किल मुकाम को हासिल करके विश्व मे भारत का मान बढाया है। ऐसी तमाम महिलाओं के जज्बे को नमन करते हुए देश ने भी उनका भरपूर समान करते हुए उनकी प्रतिभा को रेखांकित कर सर्वश्रेष्ठ भारतीय पुरूस्कार पदम-श्री से सम्मानित किया है। देशवासी के लिए ऐसी महिलाए प्रेरणा स्रोत है। जिनके मजबूत इरादे से कठिन से कठिन मुकाम भी हासिल करना संभव है।



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