हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार जन्तु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन कोविड-19 का पर्यावरण एवं मनुष्य के व्यवहार पर असर विषय पर किया गया। इस वेबिनार में भारतीय वन्य जीव संरक्षण के वरिष्ठ वैज्ञानिकों प्रो० जी०एस० रावत, प्रो० बी०डी० जोशी, प्रो० दिनेश चन्द्र भट्ट, प्रो० पी०सी० जोशी, प्रो० डी०एस० मलिक एवं अन्य विषय विशेषज्ञों ने इस सम्बन्ध में अपने-अपने शोध पत्रों का वाचन किया। वरिष्ठ वैज्ञानिक प्रो० जी०एस० रावत ने अपने सम्बोधन में कहा कि वर्तन में कोविड-19 से जनित परिस्थितियों पर पहाड़ जैव विविधता का संरक्षण करने में बहुत सुविधा रही है। लेकिन लॉक डाउन समाप्त होने की परिस्थिति में इस जैव विविधता को बनाये रखना एक चुनौती होगी। प्रो० बी०डी० जोशी ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति में अधिक सुधार हुआ है। गंगोत्री से लेकर हरिद्वार तक गंगा के जल की गुणवत्ता गंगा को प्रदूषित करने विभिन्न कारकों जैसे कि नगरपालिका एवं अन्य स्रोतों से नदी में बहने वाले दूषित जल तथा लोगों की अनुपस्थिति में विभिन्न धार्मिक स्थानों में जमा होने अवशिष्ट पदार्थों में मात्रा में बहुत कमी आई है, जिससे जल एवं अन्य पर्यावरणीय अवयवों अत्यधिक अच्छा परिवर्तन देखने को मिला है। इस अवसर पर प्रो० दिनेश भट्ट ने अपनी वार्ता में बताया कि लॉक डाउन पीरीयड वन्य जीवन के लिये वरदान साबित हुआ है। पशु-पक्षी स्वछन्द रूप से शहरी क्षेत्रों में विचरण करते रहे व प्रजनन करते रहे। उन्होंने बताया कि भारतीय उपमहाद्वीप में वसन्त ऋतु पक्षियों के प्रजनन के सर्वोत्तम सीजन होता है और इसी समय लाकडाउन हुआ जिसमें प्रकृति के सभी घटकों में मानवीय डिस्टर्वेंश शान्त हुआ। पक्षियों को प्रजनन व युगल बनने से पहले गायन करना होता है। इस बार ट्रैफिक न चलने से ध्वनि प्रदूषण न होने के कारण पक्षियों का कौमीनेशनल दूर तक गया जिससे अनेक समर्थ मादायें अच्छे गायन करने वाले पर की पहचान कर पाये। पक्षी जगत अच्छा गायन वाले नर के साथ ही मादायें आकर्षित होकर युगल बनाते हैं। उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्र के अन्दर इस अवधि में बन्दरों का आंतक भी जयादा रहा क्योंकि मन्दिरों के आस-पास रहने वाले बन्दरों को प्रसाद न मिलने से घरों के अन्दर अतिक्रमण करते पाये गये। हिमालयी क्षेत्रों में दुर्लभ प्रजाति के प्राणी मोनाल व कस्तूरी मृगों का झुण्ड गाँवों व खेतों के आस-पास विचरण करते पाये गये। क्योंकि मानवों का घरों से बाहर निकलना बन्द कर दिया था। गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय, हरिद्वार जन्तु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो० प्रकाश चन्द्र जोशी ने कहा कि कोविड-19 से पर्यावरणीय परिस्थितियों में परिवर्तन एवं मानव स्वभाव में होने वाले परिवर्तन पर अपना व्याख्यान दिया। उन्होंने कहा कि तीन माह पूर्व कोरोना वायरस चीन के वृहान शहर में एक सामान्य रोग की श्रेणी में रखा गया था लेकिन विगत तीन माह में इस माहमारी चीन सहित विश्व के अनेक देशों में एक महामारी का रूप धारण कर संक्रमित कर दिया है। यदि भारत में वर्तमान में 2 लाख के आस-पास व्यक्ति संक्रमित तथा 6 हजार से अधिक लोगों की मृत्यु हुई है। इस माहमारी ने विश्व को आर्थिक परिस्थिति बहुत क्षति पहुंचाई है। कोविड-19 के पश्चात मनुष्य के स्वभाव में निश्चित रूप से कुछ परिवर्तन देखने को मिलेंगे। जन्तु एवं पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रो० डी०एस० मलिक ने अपने वक्तव्य में गंगा नदी में जीव जन्तु की विविधता में आये हुए परिवर्तन के बारे में व्याख्यान दिया।
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