हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। अपनी 16 सूत्रीय मांगों को लेकर कोर्ट परिसर में आमरण अनशन कर रहे अधिवक्ता संजीव वर्मा का स्वास्थ्य अब खराब होने लगा है। अनशनकर्ता का कहना है कि कोरोना महामारी में लॉक डाउन के कारण अधिवक्ताओ का रोजगार ठप्प हो गया हैं। उन्हें अपना परिवार चलाने में भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। यहां तक कि उनके कुछ साथियों को पुलिस द्वारा नगद चालान काटने पर उनके पास पैसे नही होते हैं। अनशन कर्ता संजीव का कहना है कि केंद्र सरकार का अधिवक्ताओ के प्रति संवेदनहीनता समाज और देश के हित में नही है। 5 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक सरकार के किसी प्रतिनिधि ने आकर उनके अनशन का संज्ञान लेना आवश्यक नही समझा है। अधिवक्ता अरविंद ने बताया कि काफी अधिवक्ता ऐसे हैं जिनके बच्चों की फीस, बैंकों के लॉन की क़िस्त देने के कारण इन दिनों दुसरो की समस्याओं को न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता आज स्वयं केंद्र सरकार से न्याय की उम्मीद में अनशन करने को विवश हैं। अधिवक्ता जितेंद्र ठाकुर का कहना है कि सरकार उन्हें 5 लाख तक लोन की सुविधा और 20 लाख तक का इंसोरेंस की सुविधा दे। इसके अतिरिक्त जिला बार संघ अध्यक्ष नमित शर्मा ने कहा कि जिस प्रकार केंद्र सरकार ने कुछ दिशा निर्देशों के साथ शराब के ठेके, मॉल, और अन्य व्यापारी प्रतिष्ठान खोल दिये हैं, उसी प्रकार कुछ दिशा निर्देशों के साथ कोर्ट भी खोलने चाहिए थे। वर्तमान में कोर्ट के न खुलने के कारण पीड़ितों को न्याय के लिये मानसिक तनाव से गुजरना पड़ रहा है। अधिवक्ता बबली राठौड़ का कहना है कि अधिवक्ता भी समाज ही का एक हिस्सा है उनके साथ सरकार का यह व्यवहार निराशाजनक है। अधिवक्ता अलका मेहता ने अनशन कर्ता संजीव वर्मा का समर्थन करते हुवे कहा कि अधिवक्ताओ के हित मे आमरण अनशन करने के लिये पूरा बार काउंसिल उनका आभारी हैं और उनके साथ खड़ा है। नरेश भारद्वाज ने कहा कि अनशन का  5 वा दिन होने के कारण अब अनशन कर्ता का स्वास्थ्य गिरने लगा है ईश्वर न करे यदि उसके साथ कुछ अमंगल होता है तो यह केंद्र सरकार के लिये घातक सिद्ध होगा। अनशन कर्ताओं में संजीव वर्मा का साथ देने वालो में ठाकुर जितेंद्र सिंह, अरविंद श्रीवास्तव, पूर्व बार अध्यक्ष सुशील कुमार, निवेश चौधरी, सोनी निषाद, सीताराम आजाद, अनिल वालिया, जगदीप शर्मा, अतुल शर्मा, भूपेंद्र चौहान, सुमित अरोड़ा, दिनेश गौतम, शुभाष राणा, महेश चौधरी आदि रहे।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours