हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। केन्द्र सरकार की ओर से देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी की ओर से लॉक डाउन में कंपनी मालिको से करुणामय अपील की गई थी कि जो स्थाई या अस्थाई कर्मचारी आपके यहाँ अब तक कार्य करते आये हैं उनके वेतन न रोके। ताकि आपके कर्मचारियों के घर आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े। लेकिन इसे देश की विडंबना ही कहेंगे कि काफी मुनाफाखोर मालिको ने अपने कानूनी सलाहकार से परामर्श करके वो रास्ते ढूढने में अपना पैसा और दिमाक लगाया गया जिससे कि उन्हें अपने कर्मचारियों को वेतन न देना पड़े। वो भूल गए कि आस्तिकों के लिये ईश्वर भी ब्रह्माण्ड़ में है। पिछले कई वर्षों से लगातार सरकारी, अर्द्ध सरकारी कम्पनियों, या प्राइवेट कंपनीयो में अपनी जीविका चलाने वालों के लिये भारतीय मजदूर संघ कैसे पीछे रहता जैसे ही महामन्त्री सुमित सिंघल के पास वेतन न मिलने वाले पीड़ितों की सूचना मिली तुरन्त ही उन्होंने स्थानीय प्रशासन और फैक्ट्री संचालको से सम्पर्क किया परिणामस्वरूप सिडकुल हरिद्वार की कम्पनी एओएन इलेक्ट्रिक कंपनी के कर्मचारियों को उनका वेतन मिल पाया। यही ही नही इसके अतिरिक्त सिडकुल हरिद्वार की ऑटो कॉम्पोनेन्ट, रिलेक्सो, एडवांस पैनल, विजय इलेक्ट्रिकल कम्पनियों से हजारों पीड़ित मजदूरों की उनके वेतन दिलाने में मदद कर चुके हैं। इस बारे में सुमित सिंघल ने बताया कि उनका मजदूर संघ आगे भी पीड़ित मजदूर और कर्मचारियों की समस्याओं हेतु सँघर्षरत रहेगा। मोहित विश्नोई, विवेकानंदराम, विनोद मिश्रा, विपिन सैनी, घिससुपरा से दिनेश चौहान, रामलला सिंह, दयालु सिंह, नरेश कुमार, जेन्कित, राजीव, मुकेश तिवारी, मनीष मिश्रा, नंदलाल, जितेंद्र, शिवनाथ, शिवकुमार, रामकुमार ने लिखित रूप से भारतीय मजदूर संघ के सभी पदाधिकारियों का आभार व्यक्त किया है। इन सभी का कहना है कि काफी जगह भटकने के बाद हमे सुमित सिंघल के द्वारा न्याय मिल पाया जिसके लिये हम इनकी मजदूर संघ की सदा प्रशंसा करेगे। 24 मार्च से लेकर जून तक हरिद्वार की बडी बडी कम्पनियों से उनके कर्मचारियों की लगातार शिकायत मिल रही है कि उनके संचालक उन्हें विभिन्न कारणों से नौकरी से निकाल रहे हैं। ऐसे कम्पनियों के खिलाफ उन्होंने जिला प्रशासन से भी न्याय की गुहार लगाई। देखना ये है कि क्या जिला प्रशासन भारतीय मजदूर संघ की तरह जुझारूपन और अपनी शक्तियों से पीड़ित कर्मचारियों को कितना न्याय दिला पाता है।



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