हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। जीवो को जीवन देना है, पर्यावरण सुरक्षित रखना है, संचित कर जल को आज, भविष्य सुरक्षित रखना है, भारत विकास परिषद उत्तराखंड पश्चिम प्रांत द्वारा पर्यावरण दिवस के उपलक्ष में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें पर्यावरण को बचाने के लिए लोगों ने अपने-अपने विचार रखे। आज के परिवेश में आधुभनिक करण की ओर अग्रसर सभ्यता व बढ़ती जनसंख्या के कारण जंगल कम होते जा रहे हैं मशीनीकरण से प्रदूषण का तापमान बढ़ रहा है जलवायु परिवर्तन के कारण वर्षा कम हो रही है जिससे नदियों का जलस्तर गिरता जा रहा है देश में 5825 जल ब्लॉक में अधिकांश तेजी से डार्क जोन में होते जा रहे हैं, पूरे विश्व में पेयजल संकट उत्पन्न हो रहा है प्राणी व पक्षी पक्षियों का जीवन खतरे में पड़ रहा है, पानी की बर्बादी ना करते हुए वर्षा जल संग्रहण ,वाटर हार्वेस्टिंग रिचार्ज द्वारा पानी की कमी को कुछ कम किया जा सकता है। प्रांतीय अध्यक्ष श्री चंद्रगुप्त जी ने कहा कि पर्यावरण के बगैर किसी प्रकार का जीवन संभव नहीं है हवा पानी पेड़ पौधे जानवर इंसान आदि सब पर्यावरण के ही तत्व हैं हम चारों ओर पर्यावरण से घिरे हुए हैं। प्रांतीय उपाध्यक्ष बी०पी गुप्ता जी ने कहा प्रकृति द्वारा प्रदान की गई इस अमूल्य धरोहर को मनुष्य संभाल नहीं पा रहा है और अपने स्वार्थ हेतु अंधाधुंध प्रकृति का दोहन कर रहा है, प्रान्तीय वित्त सचिव श्री जेके महंगा ने कहा कि आओ हम सब मिलकर सुरक्षित भविष्य के लिए इस दिशा में संकल्प लें।
1.पशु पक्षियों के प्रति दया भाव रखें व उनको दाना पानी देते रहें।
2. कूढ़ा कचरे को इधर उधर न फेंके और दूसरों को इसके प्रति प्रेरित करें।
3.प्लास्टिक पॉलीथिन का उपयोग न करें, उसके बदले कागज के लिफाफे, कपड़ों के थेलों का उपयोग करें।
4. बिजली का अनावश्यक उपयोग ना करें और इस्तेमाल के पश्चात बंद कर दें।
5़. वर्ष में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाएं तथा उस पौधे का संरक्षण करें।
6. कल नहीं तो परसों को दूषित ना करें नदी, तालाब, पोखर आदि को प्रदूषित ना करें सदुपयोग करें। इस अवसर पर रश्मि मोंगा ने भी पर्यावरण को बचाने के लिए अपने विचार प्रकट किए। इस अवसर पर उधम सिंह, महेंद्र अहवाल, हेमंत नेगी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।



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