हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। पर्यावरण से अभिप्राय है कि वह सुरक्षा कवच जो हमें चारो ओर से सुरक्षित रखता है। परन्तु जब इस सुरक्षा कवच में रहने वाला व्यक्ति स्वयं ही इस कवच को नुकसान पहुॅचाने लगता है तब यह सुरक्षा कवच अभेद न रहकर क्षीण हो जाता है। पर्यावरण के प्रति आज का मनुष्य ऐसा ही व्यवहार कर रहा है, मानव अस्तित्व के लिए जल, जंगल और जमीन का अत्यंत महत्व है। यह संतुलन बिगडने से व्यक्ति को कुदरत का कोप भाजन सहना पडता है। जिसका स्वरूप भूकंप, साईक्लोन, सोनामी तथा कोरोना जैसी आपदाओ के रूप में मनुष्य के लिए चुनौती पैदा करता है। इन आपदाओं से बचने के लिए तथा आगामी पीढी को पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने की जिम्मेदारी भी हमे आज ही निभानी पडेगी। इसलिए घरों में बच्चों को पर्यावरण जागरूकता की इस मुहिम से जोडना जरूरी है। पर्यावरण चिंतक डाॅ0 शिव कुमार कहते है कि इस अभियान की शुरूआत आज मैने अपने घर से की है जिसमे बेट हर्षित चैहान तथा रक्षित चैहान के साथ मिलकर घर के आंगन में अमलतास के पेड लगाएं तथा इन पेडों से मिलने वाली औषधि एवं उनके मानवता के लिए फायदे बताकर पर्यावरण की सुरक्षा एवं संवर्धन के प्रति एक चिंतक के रूप में दायित्व का निर्वहन किया।



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