हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। हरिद्वार के मनोवैज्ञानिक डाॅ० शिव कुमार का कहना है कि देश में बढती हुई आत्म हत्या की घटनाएं समाज के लिए चिंता का कारण है। जिंदगी में चकाचैंध करने वाली आदतों का मुरीद होना, अव्यवस्थित रूटीन, व्यवहारिक जीवन मे तालमेल की कमी, अति संवेदनशीलता जैसी व्यवहार से जुडी समस्याएं आत्म हत्याओं का प्रमुख कारण है। व्यक्ति एक सामाजिक प्रवृत्ति का प्राणी है। वह जिस वातावरण में रहता है उससे सम्बंधित गतिविधियाॅ मे भाग लेकर वह उत्साहित एवं आनन्दित रहता है। परन्तु ऐसा न होेने के कारण वह व्याकुल एवं मन अशान्त हो जाता है। मनोवैज्ञानिक विश्लेषण से यह सिद्व हो चुका है कि अशान्त मन के कारण व्यवहार में होने वाला परिवर्तन स्थायी न होकर स्थिति जन्य होता है। जिससे बाहर निकला जा सकता है, वैश्विक एवं माया नगरी मुम्बई में फिल्म अभिनेता सुशान्त सिंह राजपूत की आत्म हत्या की घटना ने एक बार फिर समाज को इस बुराई पर विचार करने को मजबूर कर दिया है। मनोवैज्ञानिक डाॅ० शिव कुमार का कहना है कि आत्म हत्या सहज निर्णय के आधार पर की जाने वाली घटना नही है। यह एक प्रकार का मानसिक विकार है जो चिन्ता तथा गुस्से के कारण पैदा होता है। चिन्ता और गुस्से की तीव्रता व्यक्ति की विचार शक्ति को प्रभावित करती है। सुशान्त सिंह की आत्म हत्या की घटना पर मनोवैज्ञानिक कारण पर बोलते हुए उन्होने कहाॅ कि आत्म-हत्या के लिए जिम्मेदार समस्या के समाधान में व्यक्ति इतना चिंतित रहता है कि यह एक विकृति का रूप धारण कर कब अवसाद मे बदल जाती है। व्यक्ति को इसका पता ही नही चलता। यह अवसाद (डिप्रेशन) व्यक्ति के सोचने-समझने की शक्ति पर ऐसा प्रहार करता है कि व्यक्ति समाधान के सभी रास्ते स्वतः ही बंद करके अन्धकार की ऐसी कोठरी मे स्वयं को बंद कर लेता है, जहां अच्छी समझ पहुॅचना संभव नही होता। अवसाद की स्थिति में स्वयं के प्रयास से सफलता न मिलने पर व्यक्ति इतना कुंठित हो जाता है कि वह स्वयं के जीवन से ग्रणित हो जाता है। यही स्थिति आत्म हत्या का कारण बनती है। किसी भी व्यक्ति द्वारा आत्म हत्या करना आसान नही है परन्तु जीवन मे मानसिक एवं सामाजिक सन्तुलन बिगडने से झूठी प्रतिष्ठा की हानि के भय से विक्षिप्त व्यक्ति इसके लिए मजबूर हो जाता है।
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