हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा तथा मजबूत स्तम्भ होता है, जो गरीब असहाय तथा सामाजिक व्यवस्था अथवा सरकारी तंत्र के कारण बेहाल मानवता की आवाज बन कर एक प्रहरी का काम करता है। समाज का उत्थान सामाजिक समरसता तथा सेवाभाव से ही पोषित हो सकता है। परन्तु किसी सामाजिक संगठन, गैर सरकारी संस्था अथवा किसी अन्य माध्यम से सेवाभाव का यह कार्य निरन्तर जारी नही रखा जा सकता है। ऐसी दशा में लाचार, बेबस तथा सिसकती मानवता की आवाज बनकर सामाजिक जागृति लाने तथा अन्याय के खिलाफ प्रखर एवं बुलंद आवाज रूपी कलम को शस्त्र बनकर एक पत्रकार ही प्रतिदिन इस सेवा प्रकल्प को निरन्तर जारी रखता है। इसलिए एक पत्रकार समाज का प्रतिबिम्ब तथा लोकतंत्र का दर्पण होता है। आओं इस पत्रकार दिवस पर हम सब मिलकर समाज के इन सचेत प्रहरियों को नमन करें तथा इनके मंगलकारी भविष्य की कामना करते हुए बधाई दें।



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