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(रजत चौहान) हरिद्वार। महानगर व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष सामाजिक कार्यकर्ता सुनील सेठी ने जिलाधिकारी को पत्र लिखकर मेल किया, जिसमे मांग की गई कि आपदाकाल में एन०सी०ई०आर०टी की जगह बिक रही महंगे दामो की प्राइवेट पुस्तको पर रोक लगाई जानी अभिवावकहित में जरूरी है, सुनील सेठी ने पत्र में बताया कि आज पुस्तको की दुकानें खुलने पर कुछ निजी स्कूलों की पुस्तकों की सूची में एन०सी०ई०आर०टी की जगह महंगे दामो की प्राइवेट पुस्तको की सूची अभिवावकों को प्राप्त हुई। जिस कोर्स की कीमत एन०सी०ई०आर०टी के कोर्स से चार गुना महंगा है ओर जो एक ही चिन्हित दुकान से मिल रहा है। इस समय आर्थिक स्थिति से जूझ रहे आम आदमी को पुस्तको की खरीदारी पर कुछ छूट के साथ राहत मिलनी चाहिये थी। पब्लिक स्कूलों को नो प्रॉफिट न लॉस पर पुस्तके अभिवावकों को मुहैया करवाने के लिए आगे आना चाहिए था। लेकिन इसके विपरीत महंगे दामो की पुस्तकें लगाकर चार गुना पैसा वसूलने की तैयारी करना निंदनीय है। सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र चौरसिया ने मांग की है जिलाधिकारी को ऐसी मनमानी को बन्द करवा कर एन०सी०ई०आर०टी की पुस्तकों की बिक्री पुस्तक विक्रेताओ के यहांं सुनिशित करवाया जाना जरूरी है। चिन्हित विक्रेताओं की जगह पुस्तके सभी दुकानदारों के यहांं उपलब्ध करवाया जाना आवाश्यक है। एक तरफ अभिवावक फीस भरने की स्तिथि में नही वहीं पब्लिक स्कूलों द्वारा 3 माह की फीस माफ करने पर भी कोई राहत नही दी गई, दूसरी तरफ उस पर अतिरिक्त बोझ डालकर उसका शोषण किया जा रहा है जो न्याय संगत नही है। जिला प्रशासन से अपील है कि वो तुरतं इस पर ठोस कार्यवाही करें पुस्तक विक्रेताओं के यहांं पहुचाकर स्कूलों की लिस्ट चैक करें, महंगे दामो की अनावश्यक पुस्तको की बिक्री पर रोक लगावाते हुए सरकारी आदेशो का उलंघन कर रहे निजी स्कूलों पर भी कार्यवाही सुनिशित करें।



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