हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मोहम्मद आरिफ) हरिद्वार। बहादराबाद ब्लॉक क्षेत्र के अंतर्गत रोशनाबाद और अन्नेकी गांव को जोड़ने वाला पुल खनन माफियाओं व भू माफियाओं की भेंट चढ़ चुका है। पुल कई जगह से नीचे की ओर झुक गया है। लाखों की लागत से बना पुल कभी भी धराशाई हो सकता है। यह पुल कई गांव को जोड़ता हुआ रुड़की, बिहारीगढ़, देहरादून आदि क्षेत्र की ओर मुसाफिरों की मंजिल को आसान करता है। आपको बतादें कि रोशनाबाद और अन्नेकी गांव के बीच में नदी पड़ती है। जिसमें रात दिन खनन माफिया सक्रिय हैं। जो खनन सामग्री से भू माफियाओं की कॉलोनी का पेट भरने में लगे हुए हैं। मानकों की धज्जियां उड़ाते हुए यहां कॉलोनियों की बाढ़ आ चुकी है। तथा जगह-जगह कॉलोनिया काटी जा रही है। जिनका भराव कर रात दिन खनन माफिया चांदी ही चांदी काट रहे हैं। खनन माफियाओं ने दो सीमाओं को जोड़ने वाले पुल की ठोकर को भी नहीं बख्श है। लगातार पुल के नीचे से रेत, मिट्टी और आरबीएम उठाया जा रहा है। जिसका नतीजा बरसात के समय पानी आने से पुल झुक गया है और कभी भी धराशाई होकर बड़े हादसे को दावत दे सकता है। ऐसा नहीं है कि शासन-प्रशासन को इसकी भनक नहीं है। आए दिन इस पुल से राजनेताओं से लेकर आलाधिकारी, कर्मचारियों तक का गुर्जरना होता है। लेकिन किसी राजनेता, अधिकारी, कर्मचारी ने खनन माफियाओं तथा भू माफियाओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। तथा अपने कर्तव्य को ताक पर रखकर खनन माफियाओं व भू माफियाओं केे हौसले बुलंद किए हैं। जिसका खनन माफियाओं ने फायदा उठाकर लगातार भू माफियाओं द्वारा काटी जा रही कालोनियों का पेट भरने का कार्य किया जा रहा है। जहां खनन माफिया व भू माफिया अपनी तिजोरी भरने में लगे हैं वही आलाधिकारियों की लापरवाही के कारण अवैध खनन से राजस्व को भी हानि पहुंच रही है। जबकि जनपद में पूर्ण रूप से अवैध खनन बंद है। लेकिन रोशनाबाद और अन्नेकी की नदी में अवैध खनन का कारोबार खूब फल फूल रहा है। यहां आलाधिकारियों के खोखले दावे हवा हवाई हो गए हैं। जबकि रोशनाबाद से चंद दूरी पर ही जनपद के आलाधिकारी फाइलों का पेट भरने के लिए बैठे हैं। आलाधिकारियों की उदासीनता का ही नतीजा है कि यहां दिन रात बेखौफ होकर खनन माफिया ट्रैक्टर ट्रालियों व झोटा बुग्गी से अवैध खनन के काले कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। अब देखना होगा कि आलाधिकारी इस ओर क्या संज्ञान लेते हैं क्या अवैध खनन माफियाओं तथा भू माफियाओं पर कार्रवाई की जाएगी या मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। यह तो आने वाला समय ही बताएगा कि जनपद में बैठे आलाधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति कितने गंभीर हैं।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours