हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। काफी समय से वरिष्ठता आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता ज्वालापुर कोतवाली कई कई सालो से तैनात पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण को लेकर उच्चाधिकारियों से सम्पर्क कर चुके है, तथा उक्त कोतवाली मे काफी काफी समय से तैनात पुलिस कर्मियों के बारे मे शासन प्रशासन को अवगत करा चुके है, लेकिन पुलिस विभाग के उच्चाधिकारियों के कानो पर जू भी नही रेंग रही है, आपको बताते चले कि ज्वालापुर कोतवाली काफी असंवेदनशील क्षेत्र मे आती है, ज्वालापुर कोतवाली क्षेत्रान्तर्गत नशे का कारोबार अपनी चरम सीमा पर चल रहा है, और ज्वालापुर कोतवाली पुलिस को अभी तक कोई भी बडी कामयाबी नशे का जखीरा पकडने वालो को नही मिली है, शहर के कुछ लोगो को शक है, कि काफी काफी समय से तैनात पुलिस की साठगांठ नशे के बडे बडे कारोबारियों से है, जो कोई भी बडी कार्यवाही से पहले ही सूचना नशे के कारोबारियों तक छापे से पहले ही पहुँचा देते है, वरना पुलिस कर्मी नशे के कारोबारियों के पास क्या लेने जाते है, इन तथ्यो को मद्देनजर रखते हुए, ज्वालापुर कोतवाली मे कई कई सालो से तैनात पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण के लिए ग्रह सचिव, आई जी गढवाल, डी जी कानून व्यवस्था एवं अपराध को लिखा जा चुका है, लेकिन उच्चाधिकारियों के ऊपर जनभावनाओं का कोई भी असर नजर नही आ रहा है, या यू कही कि ज्वालापुर कोतवाली पुलिस की सह पर नशे का कारोबारियो से पुलिसकर्मी मिलते जुलते रहते है, तभी तो पूरे 08 माह गुजरने के बाद भी तीन तीन साल से अधिक तैनात पुलिस कर्मियों का स्थानांतरण नही किया जा रहा है, जबकि पूर्व मे भी तीन तीन साल से अधिक तैनात पुलिस कर्मियों की सूची उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है, जिसमें पुलिस कर्मियों को काफी काफी समय कोतवाली ज्वालापुर मे हो चुका है, शायद उच्चा अधिकारीगण भी व्यवस्था सुधारने के लिए चिन्तित नही है, तभी तो इतने इतने समय से तैनात पुलिस कर्मियो का स्थानांतरण नही हो पा रहा है, इतने इतने समय तैनात रहने से पुलिस कर्मी सारे अवैध धन्धे करने वालो को और उनके ठिकानो को जिन जाता है, लेकिन ज्वालापुर कोतवाली मे 20 पुलिस कर्मी ऐसे तैनात है, जिनको तीन तीन सालो से भी अधिक समय यानी लगभग 5 वर्ष हो चुके है, लेकिन अवैध धन्धो का अब तक पता नही कहाँ कहाँ हो रहे है, है ना सोचने वाली और हंसने वाली बात कि इतने इतने समय से तैनात पुलिस कर्मी नशे का जखीरा पकड नही सके, दाल मे कुछ काला है, तभी तो कई कई सालो से तैनात पुलिस कर्मियों के स्थानांतरण के लिए प्रार्थना पत्र उच्चाधिकारियों को प्रेषित किये गये थे, लेकिन कोई कार्यवाही उच्चाधिकारियों की तरफ से की प्रार्थना पत्रो की जाँच के नाम पर केवल क्षेत्राधिकारी सदर से खानापूर्ति उच्चाधिकारियों द्वारा कराई जाती है, सिस्टम को कोई भी उच्चाधिकारी सुधारने या सुधरवाने का प्रयास नही करता है, फिर कैसे व्यवस्था सुधर सकती है, जब बडे बडे पदो पर बैठे लोग ही नही चाहते है, लेकिन हम हार मानने वाले नही है, अपनि संघर्ष जारी रखेगे, ये सभी बाते वरिष्ठ आरटीआई व सामाजिक कार्यकर्ता ने अखबार से कही।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours