हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और वनाधिकार जनाधिकार आंदोलन के संयोजक श्री किशोर उपाध्याय ने कहा कि मध्य हिमालय के लिये समग्र सतत् समावेशी विकास की नीति बनाई जाए क्योंकि आज हिमालयी अरण्यजनों को बचाने  की बात कोई नहीं कर रहा, जिनका जीवन ही यह जंगल है।हरिद्वार प्रेस क्लब में पत्रकार वार्ता करते हुए उन्होंने हरिद्वार महानगर से विभाष मिश्रा, हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा से  जगपाल सैनी,रुड़की से श्रीगोपाल नारसन, लक्सर से आनन्द उपाध्याय ,रानीपुर से अरुण चौहान को आंदोलन का संयोजक मनोनीत करने के साथ ही  वनाधिकार आंदोलन 13 जिलों और 70 विधान सभा क्षेत्रों में इकाईयां गठित कर देवभूमि की युवा व महिला शक्ति को आंदोलन के साथ जोडने की बात कही।इस आंदोलन को सशक्त बनाने के लिये राष्ट्रीय स्तर आधार तैयार  किया जा रहा है। किशोर उपाध्याय ने कहा कि 2009 में चिपको आंदोलन के प्रणेता श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी ने कश्मीर से अरूणाचल तक हिमालियी राज्यों की आवाज को बुलंद करने के लिए यात्रा की, जिसका संयोजन उन्होंने स्वयं (किशोर उपाध्याय) किया था। जिसके पश्चात सर्व प्रथम हिमाचल के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने हिमालियी राज्यों का प्रथम सम्मेलन आयोजित किया था। श्री किशोर ने कहा कि  सभी उत्तराखण्ड वासियों को अरण्यजन, गिरिजन घोषित कर केंद्र की सरकार में नौकरी में आरक्षण मिलना चाहिए। पूर्व में हम वनों से लकड़ी, घांस लेते थे जिसकी एवज में आज हमें एक गैस सलेंडर व 100 यूनिट बिजली प्रति महीने फ्री दी जानी चाहिए एवं घर बनाने के लिए बजरी, पत्थर, लकड़ी मिलनी चाहिए। जब हमारा पानी दिल्ली की सरकार फ्री दे सकती है तो उत्तराखण्ड में भी फ्री पानी दिया जाना चाहिए। जंगली जानवरों बंदर-सुअर के द्वारा फसल नष्ट करने पर 1500 रु प्रति नाली या प्रति बीघा फसल का मुआवजा सरकार को किसान को देना चाहिए, साथ ही जंगली जानवर द्वारा जान से मार देने या घायल कर देने पर सरकार 25 लाख रु परिवार को मुआवजा दे। वन अधिकार अधिनियम-2006 को तुरंत उत्तराखण्ड में लागू किया जाना चाहिए जिससे उत्तराखण्ड के लोगों को उनके हक-हकूक मिल सकें। श्री किशोर उपाध्याय ने अपनी मांगों को लेकर तर्क दिया कि   उत्तराखण्ड को वनवासी प्रदेश घोषित कर उत्तराखंडियों को केंद्र सरकार की नौकरियों में आरक्षण दिया जाए। जब दिल्ली की सरकार उत्तराखण्ड का पानी दिल्ली की जनता को फ्री दे सकती है तो उत्तराखण्ड सरकार को भी जनता को फ्री पानी दिया जाना चाहिए।हमारे सारे ईंधन के कार्य जंगल से ही पूरे होते थे, इसलिए 01 गैस सिलेंडर हर महीने फ्री मिलना हमारा हक़ है। अपना घर बनाने के लिए हमे फ्री पत्थर बजरी लकड़ी आदि मिलना चाहिए। युवाओं के रोजगार के लिए उत्तराखण्ड में उगने वाली जड़ी-बूटियों के दोहन का अधिकार स्थानीय समुदाय को दिया जाए। यदि कोई जंगली जानवर किसी व्यक्ति को विकलांग कर देता है या मार देता है तो सरकार को 25 लाख रु मुआवजा व पक्की सरकारी नौकरी देनी चाहिए। जंगली जानवरों द्वारा फसलों के नुकसान पर सरकार द्वारा तुरंत प्रभाव से 1500 रु प्रति नाली के हिसाब से क्षतिपूर्ति दी जाए। वन अधिकार अधिनियम-2006 को उत्तराखण्ड में लागू किया जाए। और उत्तराखण्ड को प्रति वर्ष 10 हजार करोड़ ग्रीन बोनस दिया जाए। तिलाड़ी काण्ड के शहीदों के सम्मान में 30 मई को वन अधिकार दिवस घोषित किया जाए। इस अवसर पर हरिद्वार कांग्रेस के पूर्व महानगर अध्यक्ष अंशुल श्रीकुंज ,प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता श्रीगोपाल नारसन ने भी पत्रकार वार्ता को सम्बोधित किया।इस मौके पर सुमित तिवारी, नितिन कौशिक, तेलूराम प्रधान, प्रेम शर्मा, विशाल शर्मा, अशरफ अब्बासी, प्रतिभा रोहिला, शाहजहां मुमताज़, लक्ष्मी मिश्रा, गुलशन नैय्यर, प्रदीप आहूजा, राजेन्द्र भंवर, जयकिशन न्यूली, कुलवंत चड्ढा, जीतू चौधरी, शाहनवाज़ सिद्दीकी, विककय कोरी, बी एस चौहान, राजीव शर्मा, हरद्वारी लाल, तेजपाल सिंह, अमरेंद्र चौबे, अंगद कुमार आदि बड़ी संख्या में आंदोलन से जुड़े लोग मौजूद रहे।
Share To:

Post A Comment:

0 comments so far,add yours