हरिद्वार की गूंज (24*7)
(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। ज्वालापुर उपनगरी मे बढते नशे के काम को कुछ राजनीतिक लोगो की भी शरण मिली हुई है, नशे के बडे बडे कारोबारी राजनीतिक लोगो के लिए अच्छे से कबाब व शबाब का प्रबंधन कर देते है, इसकी एवज मे नशे के कारोबा रियों की हिमायत राजनीतिक लोग गाहे बगाहे करते नजर आते है, राजनीतिक लोगो की बदौलत भी उपनगरी ज्वालापुर मे नशे का कारोबार बढ रहा है, जिस कारण आम समाज के बच्चों को नशे की लत लग रही है, और भारत भविष्य नशे के माध्यम से अंधकार की जानिब जा रहा है, अगर समय रहते हुए गौर ना दिया गया तो, उपनगरी ज्वालापुर और जनपद हरिद्वार को पंजाब बनने से कोई रोक नही सकता है, जिस प्रकार पंजाब के अंदर नशे ने अपनी जडे जमा ली थी, ठीक इसी प्रकार उपनगरी ज्वालापुर का यही हाल होता नजर आ रहा है, जिला प्रशासन सब कुछ जानते हुए अन्जान बने हुए बैठा है, जिला प्रशासन द्वारा मेढकियां पकडी जा रही है, मगरमच्छ पकडने से जिला प्रशासन भी परहेज कर रहा है, अब ऐसा क्यो हो रहा है, यह तो जिला प्रशासन ही बता सकता है, एक बात मे आज तक समझ नही पाया हूँ, नशे के कारोबारियो को छापामारी से पूर्व ही खबर कैसे मिल जाती है, शायद जिस प्रकार पुलिस के मुख्बिर समाज मे घूमते है, लगता है, ठीक उसी प्रकार पुलिस विभाग मे भी नशे के कारोबारियों के मुख्बिर रहते है, जो पुलिस के छापेमारी से पहले ही अपने नशे के आकाओ को खबर देकर नशे के कारोबारियों को अपने ईमानदारी का सबूत पेश करते है, आखिर वफादारी क्यों नही करेगे, आखिर नशे के कारोबारियों का नमक खा रहे है, नमक हराम थोडा ही करेगे, इन बातो को ध्यान मे रखते हुए और अपने बच्चो को नशे से बचाने के लिए आम समाज को अपने आस पास बिक रहे या मिल रहे नशे के खिलाफ आवाज को हौशले के साथ उठाये और नशे के कारोबार को बंद करने के लिए मजबूर कर दे, तब जाकर ही हमारी और भारत की नश्लो और जवानी को बचाया जा सकता है।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours