हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। किसी के साथ धोखाधड़ी, बुरा होने पर लोगो को अक्सर कलयुग है पाप तो बढेगा ही आपने अक्सर सुना होगा। लेकिन जब कोई अपरिचित व्यक्ति हमारे किसी प्रियजन के जीवन की रक्षा करने निस्वार्थ भाव से रक्तदान करने अपने सभी जरूरी काम त्यागकर आता है तो हमे एहसास होता है कि अच्छे बुरे लोग सभी युगों में पाये जाते हैं। ऐसा ही 2 रक्तवीरो अरुण भारद्वाज और नीरज कुमार ने कल बीएचईएल मुख्य अस्पताल में जाकर किया जब सिडकुल हरिद्वार की किर्बी कम्पनी में कार्यरत नीरज कुमार को पता चला कि बीएचईएल निवासी एक बुजुर्ग व्यक्ति जिसका नाम जगदीश चौबे है उसको रक्त की जरूरत है। किरबी कम्पनी की ओर से दो अन्य युवक गिरीश और अनिल भी रक्त दान करने हेतु आये मगर किन्ही कारणों से डॉक्टर ने उन्हें रक्तदान करने के लिये उपयुक्त नही समझा। ऐसे ही पेशे से कंप्यूटर अध्यापक अरुण भारद्वाज को एक वाटसअप ग्रुप रक्त दान परिवार के माध्यम से पता चला कि बीएचईएल निवासी किसी बुजुर्ग को रक्त की जरूरत है तो वो भी जनहित की भावना से प्रेरित होकर अविलंब रक्तदान करने आये। बीएचईएल मुख्य अस्पताल के सीएमओ डॉक्टर दास को चाहिए कि वो रक्तदान करने वालों के लिये बीएचईएल प्रशासन या अन्य किसी संस्था के साथ मिलकर पिट्ठू बैग और प्रमाणपत्र देने की व्यवस्था बनाये। ताकि बीएचईएल मुख्य अस्पताल की व्यवस्था को कोई आधी अधूरी न कहे।




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