हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। देवसंस्कृति विश्व विद्यालय, शांतिकुंज के कुलाधिपति श्रद्धेय डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है कि चलो गाँव की ओर। भारत की संस्कृति आज भी गाँवों में जिन्दा है। गाँव में संस्कृति और संस्कृति से उत्सव आज भी जीवन्त दृश्यमान होते हैं। वे नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं के स्वागत में आयोजित उन्नयन-2019 के समापन अवसर पर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उन्नयन का अर्थ है हर कदम पर ऊँचे उठना। हमारे देश में विविध प्रकार की संस्कृति है। हमें इस संस्कृति को अपने रोम-रोम में समाना होगा। हमें फिर से अपनी संस्कृति की ओर लौटना चाहिए। कुलाधिपति ने कहा कि आज के जमाने में इंसान को फिट रहना जरूरी है और यह योग व व्यायाम से ही संभव है। जीवन को संतुलित बनाने के लिए और हर दुःखों से छुटकारा पाने के लिए हमें योग और व्यायाम को जीवन में उतारना होगा। उन्नयन देसंविवि द्वारा शुरु की गई एक नई पहल है, जो पुराने छात्रों द्वारा नवांगतुक विद्यार्थियों के स्वागत के उपलक्ष्य में आयोजित होता है। देसंविवि की यह पहल अपने आपमें अनूठी है। देसंविवि में सीनियर छात्र-छात्राओं द्वारा नवप्रवेशी विद्यार्थियों के स्वागत में एक विशेष कार्यक्रम ‘उन्नयन’ आयोजित होता है। उन्नयन-२०१९ में सीनियर विद्यार्थियों ने प्यार और सहकार के साथ नये छात्रों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के छात्र छात्राओं ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। नटराज नृत्य, उत्तराखंड की गढ़वाली नृत्य, योग प्रदर्शन, बंगाली नृत्य नाटक चलो गाँव की ओर जैसे रंगारंग कार्यक्रमों के माध्यम से छात्र-छात्राओं ने दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर देसंविवि के कुलपति श्री शरद पारधी, प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या, कुलसचिव श्री बलदाऊ देवांगन सहित विवि के समस्त अधिकारी एवं छात्र-छात्राएँ मौजूद रहे। उन्नयन कार्यक्रम से पूर्व विवि स्थित प्रज्ञेश्वर महादेव मंदिर में बच्चों के उज्जवल भविष्य हेतु दीपयज्ञ का आयोजन किया गया। जिसका शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव ने किया। इसमें विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं सहित चीन से आये 25 विद्यार्थियों के दल ने भी प्रतिभाग किया।
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