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(निशात कुरैशी) देवबन्द। पवित्र रमजान माह के अलविदा जुमा की नमाज एशिया की प्रसिद्ध मस्जिद रशिदिया सहित नगर व देहात की तमाम मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई,रोजेदारों ने नमाज अदा कर अल्लाह की बारगाह में हाथ फैलाकर अपने गुनाहों की तौबा करते हुए पुरे साल इसी तरह रहमतें और बरकतें नाजिल करने और मुल्क के अमन-चैन और खुशहाली की दुआ मांगी गई,
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रमजान के अलविदा जुमा की नमाज में उलेमा-ए-कराम ने अमन और गुनाहों की तौबा एवं गर्मी से निजात को रहमत की बारिश एवं मुल्क में भाईचारे की दुआ कराई। नगर की प्रमुख मस्जिद मरकजी जामा मस्जिद में अलविदा जुमा की  नमाज अदा कराते हुए मुफ्ती मोहम्मद आरिफ कासमी ने आह्वान किया कि अल्लाह और उसके रसूल के साथ मोहब्बत रखना हो तो गुनाहों को छोड़ना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि रमजान माह में अल्लाह रब्बुल इज्जत स्वंय रोजेदारों की इबादतों का सवाब देता है। उन्होंने कहा कि अगर हमने अपने गुनाहों को छोड़ने की आदत नहीं डाली तो हमारे गुनाह हमारी इबादतों को मिटा देंगे।  मुफ्ती आरिफ ने कहा कि गुनाहों से ही बीमारियां और प्राकृतिक आपदाएं आती हैं।   अपने आप को गुनाहों से बचाओ और मेहनत और हलाल की कमाई करने वालो की ही अल्लाह रब्बुल इज्जत इबादत कबुल करते हैं।  अल्लाह का जिक्र कसरत के साथ करना चाहिए।  मस्जिद-ए-रशिदीया में मुफ्ती कारी अफ्फान मंसूरपुरी ने अलविदा जुमा की नमाज अदा कराई। नमाज के बाद उन्होंने आपसी सौहार्द को बढ़ावा देने के साथ रमजान में इबादतों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अल्लाह रब्बुल इज्जत को आपसी मेलजोल को पंसंद किया है। उन्होंने कहाकि अपने अपने पड़ौस का ख्याल रखना चाहिए चाहे वह किसी भी मजहब के क्यों ना हो।  दारुल उलूम की कदीम मस्जिद, आदीनी मस्जिद, काजी मस्जिद, मोहल्ला पठानपुरा की जामा मस्जिद, मोहल्ला किला की जामा मस्जिद समेत नगर की अन्य प्रमुख मस्जिदों में पेश-इमाम ने नमाज-ए-जुमा अदा कराई। देहात की जामा मस्जिदों में नमाज-ए-जुमा अदा होने के बावजूद बड़ी संख्या में ग्रामीणो ने देवबंद पहुंच अलविदा जुमा की नमाज अदा की। 
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