हरिद्वार की गूंज (24*7)
(गगन शर्मा) हरिद्वार। दोपहिया वाहन पर चालक के लिये हैलमेट पहनना पहले भी कानूनन जरूरी था। उसके बाद उच्च न्यायालय ने पिछली सवारी के लिये भी 15 अगस्त 2018 के बाद से हैलमेट अनिवार्य कर दिया था। आखिर उच्च न्यायालय या सीपीयू को क्या पड़ी हैलमेट न पहनने वाले का चालान काटने की?
देश के अधिकांश नागरिकों को भलीभांति पता है कि भारत देश मे जितनी असमय मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं के कारण होती है उतनी बीमारियों के कारण भी नही होती है। उसे देखते हुवे देश की अदालत ने निर्णय लिया गया कि दोपहिया वाहन पर बिना हैलमेट के चलने वालों का चालान कटेगा। जिन क्षेत्रों में सीपीयू कार्यरत हैं वहाँ का अनुपात हैलमेट पहनने वालो का 90 फीसदी है। जो कि संतोषजनक है।
फोर व्हीलर पर सीट बेल्ट बांधने का मामला हो या दो पहिये वाहन पर हैलमेट लगाकर चलने का दोनो का सम्बंध हमारी सुरक्षा से है, जिसे काफी लोग समझना नही चाहते। हरिद्वार सीपीयू प्रभारी दिनेश पंवार ने बताया कि उन्हें दिनभर ऐसे बहुत से ढीठ तरह के गैर जिम्मेदार वाहन चालक मिलते हैं, जो कहते हैं कि आप चालान काट लो, हम हैलमेट नही लगायेंगे। डॉक्टर रमेश चंद चावला का कहना है कि सड़क दुर्घटना में सर के अलावा शरीर के किसी अन्य भाग पर चोट लग जाय तो जीवन बचाने के चांस काफी होते हैं, मगर सर पर चोट लगने के बाद जीवन के बचने का अवसर ना के बराबर होता है। अतः प्रत्येक वाहन चालक को यह सोचकर सीट बेल्ट या हैलमेट लगाना चाहिए कि वो पृथ्वी का सबसे अनमोल व्यक्ति है उसके जीवन की उसके स्वयं के परिवार के अलावा समाज और देश को बहुत जरुरत है। सीपीयू विभाग से आ जनता को सबसे ज्यादा शिकायत इस बात की रहती है कि वो बहुत ही कम ऐसा देखा जाता है जब सीपीयू कर्मियों ने किसी पुलिस वाले का चालान काटा हो। जो कि निंदनीय है, शिव प्रसाद डबराल पुर्व सीपीयू प्रमुख ने बताया था कि जब किसी भी कारण से किसी पुलिस कर्मी या अधिकारी की मृत्यु होती है तो उसका पद भरने की प्रक्रिया बड़ी जटिल है। अतः किसी भी पुलिस कर्मी या अधिकारी को यातायात के नियमो का पालन करते हुवे या अन्य कारणों से स्वयं के जीवन की रक्षा करनी चाहिए। हालांकि ये भी जानकारी मिली थी कि सामान्य नागरिकों की अपेक्षा कानून के रक्षको द्वारा यातायात की नियमो का उलंघन करने पर विभागीय कार्यवाही भी होती है। मगर यदि ऐसा तो तभी संभव हो पायेगा जब सीपीयू या पुलिस विभाग बिना पक्षपात किये यातायात के नियमो का उलंघन करने वालो का चालान काटेंगे। जबकि ऐसा न के बराबर ही होता है। बड़े अधिकारी भी विभागीय चालान काटने से बचते देखे गए हैं। मीडिया वर्ग और आम जनता पुलिस के अधिकारियों से अपेक्षा करती है कि जब वो कोई विभागीय चालान काटे तो उसे छोटे बड़े अखबार के द्वारा जनता को अपनी निष्पक्ष कार्यवाही दिखाये।
फोर व्हीलर पर सीट बेल्ट बांधने का मामला हो या दो पहिये वाहन पर हैलमेट लगाकर चलने का दोनो का सम्बंध हमारी सुरक्षा से है, जिसे काफी लोग समझना नही चाहते। हरिद्वार सीपीयू प्रभारी दिनेश पंवार ने बताया कि उन्हें दिनभर ऐसे बहुत से ढीठ तरह के गैर जिम्मेदार वाहन चालक मिलते हैं, जो कहते हैं कि आप चालान काट लो, हम हैलमेट नही लगायेंगे। डॉक्टर रमेश चंद चावला का कहना है कि सड़क दुर्घटना में सर के अलावा शरीर के किसी अन्य भाग पर चोट लग जाय तो जीवन बचाने के चांस काफी होते हैं, मगर सर पर चोट लगने के बाद जीवन के बचने का अवसर ना के बराबर होता है। अतः प्रत्येक वाहन चालक को यह सोचकर सीट बेल्ट या हैलमेट लगाना चाहिए कि वो पृथ्वी का सबसे अनमोल व्यक्ति है उसके जीवन की उसके स्वयं के परिवार के अलावा समाज और देश को बहुत जरुरत है। सीपीयू विभाग से आ जनता को सबसे ज्यादा शिकायत इस बात की रहती है कि वो बहुत ही कम ऐसा देखा जाता है जब सीपीयू कर्मियों ने किसी पुलिस वाले का चालान काटा हो। जो कि निंदनीय है, शिव प्रसाद डबराल पुर्व सीपीयू प्रमुख ने बताया था कि जब किसी भी कारण से किसी पुलिस कर्मी या अधिकारी की मृत्यु होती है तो उसका पद भरने की प्रक्रिया बड़ी जटिल है। अतः किसी भी पुलिस कर्मी या अधिकारी को यातायात के नियमो का पालन करते हुवे या अन्य कारणों से स्वयं के जीवन की रक्षा करनी चाहिए। हालांकि ये भी जानकारी मिली थी कि सामान्य नागरिकों की अपेक्षा कानून के रक्षको द्वारा यातायात की नियमो का उलंघन करने पर विभागीय कार्यवाही भी होती है। मगर यदि ऐसा तो तभी संभव हो पायेगा जब सीपीयू या पुलिस विभाग बिना पक्षपात किये यातायात के नियमो का उलंघन करने वालो का चालान काटेंगे। जबकि ऐसा न के बराबर ही होता है। बड़े अधिकारी भी विभागीय चालान काटने से बचते देखे गए हैं। मीडिया वर्ग और आम जनता पुलिस के अधिकारियों से अपेक्षा करती है कि जब वो कोई विभागीय चालान काटे तो उसे छोटे बड़े अखबार के द्वारा जनता को अपनी निष्पक्ष कार्यवाही दिखाये।





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