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(इमरान देशभक्त ब्यूरो) रुड़की। विधायक प्रदीप बत्रा ने कहा कि मुशायरे एवं कवि सम्मेलन हमारे देश की राष्ट्रीय एकता व अखंडता की मजबूती को दर्शाते हैं। ऐसे सम्मेलनों से जहां हमारे देश की अखंडता मजबूत होती है वहीं समाज में आपसी भाईचारा एवं सद्भावना भी बढ़ता है।उक्त् विचार नगर विधायक प्रदीप बत्रा ने आईआईटी स्थित ओपी जैन सभागार में आयोजित कवि/मुशायरा सम्मेलन का दीप प्रज्वलित कर उद्घाटन करते हुए व्यक्त किए।उन्होंने कहा कि कवि सम्मेलन व मुशायरे सदियों से हमारे देश की पहचान रहें हैं, जिसमें हिंदू-मुस्लिम एकता की झलक दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर ऐसे मुशायरों का आयोजन किया जाता रहना चाहिए, ताकि देश की भावी पीढ़ी को हमारी गंगा-जमुनी संस्कृति व तहजीब को जानने का अवसर मिले।युवा समाजसेवी गौरव गोयल, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता कुंवर जावेद इकबाल, समाज सेविका डॉक्टर संगीता, महिला आयोग की सदस्य रश्मि चौधरी, बीडीओ मनिंदर कौर ने भी अतिथि के रूप में बोलते हुए मुशायरे को भारतीय एकता का प्रतीक बताया तथा कहा कि इसमें हिंदी-उर्दू का मिश्रण हमारी राष्ट्रीय एकता को दर्शाता है। संचालन कर रहे युवा शायर अल्तमश अब्बास ने मुशायरे को भारतीय सभ्यता की मिली-जूली संस्कृति बताया।कवि सम्मेलन की अध्यक्षता आर्य कन्या के प्रबंधक वीरेंद्र गुप्ता ने की।देर रात तक चले इस कवि सम्मेलन में मौजूदा देश के हालात, आतंकवाद, संप्रदायिक सद्भाव पर आधारित अनेक अशआर प्रस्तुत किए गए। कवि सम्मेलन में आए मशहूर शायर डॉ.नवाज देवबंदी ने अपने कलाम से श्रोताओं को इस तरह से नवाजा कि... जलते घर को देखने वालों फूस का छप्पर आपका है, आग के पीछे तेज हवा है आगे मुकद्दर आपका है। युवा शायर अल्तमश अब्बास अब्बास ने अपने कलाम से श्रोताओं को कुछ इस तरह से नवाजा कि...।जिंदगी जब ढलान से उतरे, यह दुआ है कि शान से उतरे। मशहूर कवित्री पद्मिनी शर्मा ने अपने कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने पढ़ा कि...भारत की संस्कृति परम पुनीता बचा लो, कर्मों की अदालत में अपनी गीता बचा लो, मंदिर तो आजकल में बन ही जाएगा, मगर कलयुग के रावण से अपनी सीता बचा लो।।चंदेरी से पधारे शायर असरार चंदेरी ने पढ़ा कि... मुलाकातों की बरकत के लिए तोहफा जरूरी है, मोहब्बत में मियां अब दिल नहीं पैसा जरूरी है। सहारनपुर से पधारे शायद बिलाल सहारनपुरी ने अपने कलाम से कुछ इस तरह नवाजा कि... सदके जाऊं इसके मैं कुर्बान इस पर जान है, सबसे अच्छा इस जहां में अपना हिंदुस्तान है। शायर खुर्शीद हैदर के शेर को लोगों ने खूब सराहा, उन्होंने पढ़ा कि... गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वहीं उड़ेंगे जिनके अपने पर होंगे। उस्ताद शायर महेंद्र अश्क के कलाम को भी श्रोताओं द्वारा खूब सराहा गया, उन्होंने पढ़ा कि... लोग जब तर्क ए ताल्लुक का सबब पूछेंगे, मुझसे कुछ भी ना कहा जाएगा तुम साथ चलो। उपरोक्त अलावा शायर नफस अंबालवी, डॉ नदीम शाद आदि शायरों ने भी अपने- अपने कलाम पेश किए। इस अवसर पर पार्षद किरण भाटिया, पीसीसी सदस्य डॉक्टर नैय्यर काजमी, सुधीर शांडिल्य, मरगूब कुरैशी, उमेश चौहान, रियाज कुरेशी, शहजाद अली, शारिक अफरोज, सिराज मेहंदी, शाकिर अली, शादाब गुल आदि बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। अंत में कार्यक्रम संयोजक पवन शर्मा एवं शहजाद अली द्वारा अतिथि गणों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
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