हरिद्वार की गूंज (24*7)
(इमरान देशभक्त ब्यूरो) रुड़की। साहित्यिक संस्था "हिंदी साहित्यदय" की ओर से सन् 1857 क्रांति के अमर शहीदों की याद में 'एक शाम-शहीदों के नाम' आयोजित कार्यक्रम में कवियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को समर्पित कविताओं के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।गांधीनगर स्थित कुमाऊँ धर्मशाला में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में पहुंचे भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री गौरव गोयल ने कहा कि देश को आजादी दिलाने में हजारों लाखों की संख्या में देशवासियों का बलिदान रहा,जिनके त्याग और बलिदान के कारण ही हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ।आज हमें अमर शहीदों की याद में श्रद्धांजलि के रूप में श्रद्धा सुमन अर्पित करने का अवसर प्राप्त हुआ है वह हमें उन शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। उन अमर शहीदों द्वारा देश हित में दिए गए बलिदान को सदैव याद रखने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।कवि सम्मेलन में पधारे डॉ. आनंद भारद्वाज ने अपनी कविता के माध्यम से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।
उन्होंने पढ़ा कि...जितना भी असलाह जोड़ा है तूने इस बदहाली में,उतना असलाह फूंक दिया जाता है यहां तो एक दिवाली में।
मेरठ से पधारे कवि डॉ.प्रदीप गुप्ता ने पढ़ा कि...मान बांटता हूं सम्मान बढ़ता हूं मैं, सच्चा सुंदर टिकाऊ बांटता हूं मैं, मेरी मां ने सिखलाया है एक हुनर मुझको, अपने शब्दों से मुस्कान बांटता हूं मैं।
कवि हरि प्रकाश खामोश ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए पढा कि...आओ दिए जलाए उन शहीदों के नाम पर, देश खातिर खेल गए जो अपनी जान पर। अलका धनसाला में भी श्रोताओं की खूब तालियां बटोंरी।उन्होंने पढ़ा कि...राम कलयुग में अब आप आना नहीं, आप के योग्य कोई ठिकाना नहीं।कार्यक्रम संयोजक राम शंकर सिंह,अमन गोयल, सुरेंद्र भाई, मधुराका सक्सेना, वेद ठाकुर, राजेंद्र सैनी राज आदि कवियों ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर दिनेश कुमार, राजपाल सिंह, योगेंद्र सिंह, भास्कर दत्त, हरीश भट्ट आदि अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा मुख्यअतिथि को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया वहीं अतिथि गण द्वारा कवि सम्मेलन में पूर्व सैनिकों को भी शॉल एवं फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया।
(इमरान देशभक्त ब्यूरो) रुड़की। साहित्यिक संस्था "हिंदी साहित्यदय" की ओर से सन् 1857 क्रांति के अमर शहीदों की याद में 'एक शाम-शहीदों के नाम' आयोजित कार्यक्रम में कवियों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीदों को समर्पित कविताओं के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।गांधीनगर स्थित कुमाऊँ धर्मशाला में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यअतिथि के रूप में पहुंचे भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री गौरव गोयल ने कहा कि देश को आजादी दिलाने में हजारों लाखों की संख्या में देशवासियों का बलिदान रहा,जिनके त्याग और बलिदान के कारण ही हमारा देश अंग्रेजों की गुलामी से मुक्त हुआ।आज हमें अमर शहीदों की याद में श्रद्धांजलि के रूप में श्रद्धा सुमन अर्पित करने का अवसर प्राप्त हुआ है वह हमें उन शहीदों के बलिदान की याद दिलाता है। उन अमर शहीदों द्वारा देश हित में दिए गए बलिदान को सदैव याद रखने की आवश्यकता है। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।कवि सम्मेलन में पधारे डॉ. आनंद भारद्वाज ने अपनी कविता के माध्यम से श्रोताओं की खूब तालियां बटोरी।
उन्होंने पढ़ा कि...जितना भी असलाह जोड़ा है तूने इस बदहाली में,उतना असलाह फूंक दिया जाता है यहां तो एक दिवाली में।
मेरठ से पधारे कवि डॉ.प्रदीप गुप्ता ने पढ़ा कि...मान बांटता हूं सम्मान बढ़ता हूं मैं, सच्चा सुंदर टिकाऊ बांटता हूं मैं, मेरी मां ने सिखलाया है एक हुनर मुझको, अपने शब्दों से मुस्कान बांटता हूं मैं।
कवि हरि प्रकाश खामोश ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए पढा कि...आओ दिए जलाए उन शहीदों के नाम पर, देश खातिर खेल गए जो अपनी जान पर। अलका धनसाला में भी श्रोताओं की खूब तालियां बटोंरी।उन्होंने पढ़ा कि...राम कलयुग में अब आप आना नहीं, आप के योग्य कोई ठिकाना नहीं।कार्यक्रम संयोजक राम शंकर सिंह,अमन गोयल, सुरेंद्र भाई, मधुराका सक्सेना, वेद ठाकुर, राजेंद्र सैनी राज आदि कवियों ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस अवसर पर दिनेश कुमार, राजपाल सिंह, योगेंद्र सिंह, भास्कर दत्त, हरीश भट्ट आदि अनेक लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में आयोजकों द्वारा मुख्यअतिथि को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया वहीं अतिथि गण द्वारा कवि सम्मेलन में पूर्व सैनिकों को भी शॉल एवं फूल माला पहनाकर सम्मानित किया गया।



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