हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौहम्मद आरिफ) हरिद्वार। जहां गर्मी के मौसम में चिलचिलाती धूप ने लोगों को अपने घरों में कैद करने को मजबूर कर रखा है। तो वही वन विभाग ने वन गुर्जरों के आशियानो को उजाड़ कर उनके छोटे-छोटे बच्चों को खुले आसमान के नीचे झुलसने को विवष है। यह मामला खानपुर रेंज शाह मंसूर शाह बीट का हैं
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जहां वन विभाग कर्मचारियों ने वन गुर्जरों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके डेरो में तोड़फोड़ की है। वन गुर्जरों को बिना किसी सूचना के यह कार्रवाई की गई हैं। वन विभाग की कार्रवाई का विरोध करने पर उनके साथ मार पीट भी की गई। चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे रहने को वन गुर्जरों के परिवार को छोड़ दिया है।
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वहीं वन गुज्जर महिला मरियम ने बताया कि आज वन विभाग कर्मियों ने डेरे पर आकर हमारे छप्पर तोड़ दिए हैं हमें बेघर कर दिया है। उन्होंने बताया हमें किसी प्रकार की सूचना तक नहीं दी गई। वन कर्मियों ने अचानक आकर हमारे छप्पर मेंं रखा घरेलू सामान बाहर फेंक कर छप्पर को तोड़ना शुरू कर दिया, विरोध करने पर वो नहीं माने। उन्होंने बताया कि हमारे साथ छोटे-छोटे बच्चे हैं इन बच्चों को लेकर झुलसाती गर्मी के मौसम में हम कहां जाएं। वहीं वन गुज्जर शराफत ने बताया कि वन कर्मियोंं ने जबरन हमारे घर तोड़े है जब हमने उन्हें रोकनेेे की कोशिश की, तो उन्होंने मेरेेेे साथ कंडों से मारपीट की है। फातिमा ने बताया कि इस वन में हमारा परिवार 80, 90 वर्षों से रहता आ रहा है। अचानक वन कर्मियों ने आकर हमारे रहने का सहारा तो डाला और ना ही कोई नोटिस दिया गया है। तो वहीं गुज्जर गालीब हसन ने बताया कि मैंने देखा कि वन विभाग के कर्मचारी यहां मारपीट कर रहे हैं और उनके छपरो को तोड़ रहेे हैं। उन्होंने कहा कि यह गलत है जैसे राजाजी राष्ट्रीय पार्क के गुर्जरों को सरकार ने जमीन दी है ऐसे ही इनको भी जमीन उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने शासन प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि शासन-प्रशासन सही फैसला करें किसी केे साथ भी गलत ना करें।
जहां वन विभाग कर्मचारियों ने वन गुर्जरों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उनके डेरो में तोड़फोड़ की है। वन गुर्जरों को बिना किसी सूचना के यह कार्रवाई की गई हैं। वन विभाग की कार्रवाई का विरोध करने पर उनके साथ मार पीट भी की गई। चिलचिलाती धूप में खुले आसमान के नीचे रहने को वन गुर्जरों के परिवार को छोड़ दिया है।
वहीं वन गुज्जर महिला मरियम ने बताया कि आज वन विभाग कर्मियों ने डेरे पर आकर हमारे छप्पर तोड़ दिए हैं हमें बेघर कर दिया है। उन्होंने बताया हमें किसी प्रकार की सूचना तक नहीं दी गई। वन कर्मियों ने अचानक आकर हमारे छप्पर मेंं रखा घरेलू सामान बाहर फेंक कर छप्पर को तोड़ना शुरू कर दिया, विरोध करने पर वो नहीं माने। उन्होंने बताया कि हमारे साथ छोटे-छोटे बच्चे हैं इन बच्चों को लेकर झुलसाती गर्मी के मौसम में हम कहां जाएं। वहीं वन गुज्जर शराफत ने बताया कि वन कर्मियोंं ने जबरन हमारे घर तोड़े है जब हमने उन्हें रोकनेेे की कोशिश की, तो उन्होंने मेरेेेे साथ कंडों से मारपीट की है। फातिमा ने बताया कि इस वन में हमारा परिवार 80, 90 वर्षों से रहता आ रहा है। अचानक वन कर्मियों ने आकर हमारे रहने का सहारा तो डाला और ना ही कोई नोटिस दिया गया है। तो वहीं गुज्जर गालीब हसन ने बताया कि मैंने देखा कि वन विभाग के कर्मचारी यहां मारपीट कर रहे हैं और उनके छपरो को तोड़ रहेे हैं। उन्होंने कहा कि यह गलत है जैसे राजाजी राष्ट्रीय पार्क के गुर्जरों को सरकार ने जमीन दी है ऐसे ही इनको भी जमीन उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने शासन प्रशासन से गुहार लगाते हुए कहा कि शासन-प्रशासन सही फैसला करें किसी केे साथ भी गलत ना करें।



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