हरिद्वार की गूंज (24*7)
(मौ० आरिफ) हरिद्वार। मशहूर सूचना अधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल सत्तार ने उत्तराखंड की मित्र पुलिस को लेकर हरिद्वार की गूंज, HKG NEWS पोर्टल के माध्यम से आला पुलिस अधिकारियों से पूछा है, कि उत्तराखंड पुलिस मित्र पुलिस है, लेकिन पुलिस की मित्रता किससे है, सम्मानित आम समाज से है, या अपने ही विभाग से या अवैध धन्धा करने वालो से लेकिन मेरी राय मे मित्र पुलिस आम समाज की मित्र नही है, क्योंकि मित्र पुलिस के कुछ लोग अवैध कारोबारियों से पूरी पूरी मित्रता निभा रहे है, पुलिस विभाग सभी कुछ जानता है, लेकिन अपने ही विभाग के कुछ लोगो से मित्रता निभा रहा है, इसलिए कुछ पुलिस कर्मी काफी काफी समय से थानो मे तैनात है, एक एक थाने मे तैनात हुए सालो साल गुजर गये, लेकिन कोई स्थानांतरण नही हुआ है, जबकि पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत करा दिया गया है,
लेकिन समाज की भलाई के लिए अवगत कराई गयी स्थिति पर कोई मित्रता उत्तराखंड पुलिस के आला अधिकारियों ने नही दिखाई है, आखिर पुलिस विभाग का ऐसा दोहरा पैमाना क्यो है,कुछ गम्भीर स्थिति के बारे मे ज्वालापुर कोतवाली के सम्बंध मे पुलिस के आला अधिकारियों और निर्वाचन विभाग को अवगत कराया गया था, लेकिन उत्तराखंड पुलिस सदैव सेवा मे तत्परता का नारे देने वाली पुलिस ने अवगत कराई गयी स्थिति पर कोई कार्यवाही नही की है, इन सभी तथ्यों को देखते हुए पुलिस से पूछना चाह रहा हूँ, कि पुलिस किसकी मित्र है,
आम समाज की अपने विभाग की या फिर नशे के अवैध धन्धा करने वाली की, चुनाव करीब है, फिर भी अवगत कराई गयी स्थिति पर निर्वाचन आयोग, पुलिस विभाग कार्यवाही करने को तैयार नही है, पुलिस और निर्वाचन आयोग के ढुलमुल रव्वैये से निष्पक्ष चुनाव होने मे शक पैदा होता है, लेकिन आम समाज से अपील है, कि किसी भी प्रकार के अवैध धन्धों को होता देखो तो पुलिस के आलाधिकारी को सूचना दो, पुलिस विभाग कार्यवाही करति है, या नही वो पुलिस विभाग जाने लेकिन समाज के अच्छे नागरिक होकर बुराई से डरो मत डटकर मुकाबला करो, ताकि कल पुलिस विभाग ये ना कह दे कि हमे सूचना क्यो नही दी, अगर आपने सूचना दी पुलिस विभाग ने कार्यवाही नही की और कोई अनहोनी हो गयी तो आम समाज उस अनहोनी का जिम्मेदार नही होगा, पुलिस विभाग उस अनहोनी का जिम्मेदार होगा, इसलिए ज्वालापुर के अतिसंवेदन शील क्षेत्र होने के नाते मेने एक सम्मानित नागरिक की हैसियत से निर्वाचन आयोग और पुलिस विभाग को ज्वालापुर क्षेत्र और कोतवाली की समस्याओ के सम्बंध मे अवगत करा दिया है, चुनाव मे अवैध नशे की साम्रगियों के आवागमन पर रोक लगाती है, या नही ये काम पुलिस का है।
(मौ० आरिफ) हरिद्वार। मशहूर सूचना अधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल सत्तार ने उत्तराखंड की मित्र पुलिस को लेकर हरिद्वार की गूंज, HKG NEWS पोर्टल के माध्यम से आला पुलिस अधिकारियों से पूछा है, कि उत्तराखंड पुलिस मित्र पुलिस है, लेकिन पुलिस की मित्रता किससे है, सम्मानित आम समाज से है, या अपने ही विभाग से या अवैध धन्धा करने वालो से लेकिन मेरी राय मे मित्र पुलिस आम समाज की मित्र नही है, क्योंकि मित्र पुलिस के कुछ लोग अवैध कारोबारियों से पूरी पूरी मित्रता निभा रहे है, पुलिस विभाग सभी कुछ जानता है, लेकिन अपने ही विभाग के कुछ लोगो से मित्रता निभा रहा है, इसलिए कुछ पुलिस कर्मी काफी काफी समय से थानो मे तैनात है, एक एक थाने मे तैनात हुए सालो साल गुजर गये, लेकिन कोई स्थानांतरण नही हुआ है, जबकि पुलिस विभाग के आला अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत करा दिया गया है,
लेकिन समाज की भलाई के लिए अवगत कराई गयी स्थिति पर कोई मित्रता उत्तराखंड पुलिस के आला अधिकारियों ने नही दिखाई है, आखिर पुलिस विभाग का ऐसा दोहरा पैमाना क्यो है,कुछ गम्भीर स्थिति के बारे मे ज्वालापुर कोतवाली के सम्बंध मे पुलिस के आला अधिकारियों और निर्वाचन विभाग को अवगत कराया गया था, लेकिन उत्तराखंड पुलिस सदैव सेवा मे तत्परता का नारे देने वाली पुलिस ने अवगत कराई गयी स्थिति पर कोई कार्यवाही नही की है, इन सभी तथ्यों को देखते हुए पुलिस से पूछना चाह रहा हूँ, कि पुलिस किसकी मित्र है,
आम समाज की अपने विभाग की या फिर नशे के अवैध धन्धा करने वाली की, चुनाव करीब है, फिर भी अवगत कराई गयी स्थिति पर निर्वाचन आयोग, पुलिस विभाग कार्यवाही करने को तैयार नही है, पुलिस और निर्वाचन आयोग के ढुलमुल रव्वैये से निष्पक्ष चुनाव होने मे शक पैदा होता है, लेकिन आम समाज से अपील है, कि किसी भी प्रकार के अवैध धन्धों को होता देखो तो पुलिस के आलाधिकारी को सूचना दो, पुलिस विभाग कार्यवाही करति है, या नही वो पुलिस विभाग जाने लेकिन समाज के अच्छे नागरिक होकर बुराई से डरो मत डटकर मुकाबला करो, ताकि कल पुलिस विभाग ये ना कह दे कि हमे सूचना क्यो नही दी, अगर आपने सूचना दी पुलिस विभाग ने कार्यवाही नही की और कोई अनहोनी हो गयी तो आम समाज उस अनहोनी का जिम्मेदार नही होगा, पुलिस विभाग उस अनहोनी का जिम्मेदार होगा, इसलिए ज्वालापुर के अतिसंवेदन शील क्षेत्र होने के नाते मेने एक सम्मानित नागरिक की हैसियत से निर्वाचन आयोग और पुलिस विभाग को ज्वालापुर क्षेत्र और कोतवाली की समस्याओ के सम्बंध मे अवगत करा दिया है, चुनाव मे अवैध नशे की साम्रगियों के आवागमन पर रोक लगाती है, या नही ये काम पुलिस का है।





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