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(इमरान देशभक्त ब्यूरो) रुड़की। पैग़ंबरे इस्लाम हजरत मोहम्मद सल्ल. के बताएं हुए मार्ग पर चलकर ही दुनिया व आखिरत में मुसलमानों की कामयाबी है। आज इस्लाम की शिक्षाओं से मुसलमानों का दूर होना उसके लिए परेशानियों का प्रमुख कारण है। यह बातें मौलाना सैयद शाहिद हुसैन ने जमीउल हुदा गढ़ी में आयोजित जलसा दस्तारे फजीलत में अपने संबोधन में कही। उन्होंने कहा कि अल्लाह के प्यारे नबी मोहम्मद सल्ल. के बाद दुनिया में अब कोई नबी नहीं आएगा तथा उनके आदर्शों को अपना कर ही मुसलमान यदि अपनी जिंदगी को गुजारे तो उसकी दीन और दुनिया की सभी मुश्किलें आसान हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया के लिए पैगंबर इस्लाम को अल्लाह ताला ने रहमतुललिल आलमीन बना कर भेजा।इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वे अपने पड़ोसी और तमाम आलम के लोगों के लिए खुश-अखलाक, प्यार-मोहब्बत, अमन और भाईचारे का सबूत पेश करें। मौलाना अब्दुल खालिक संभली ने कहा कि बच्चों को उनके मां-बाप अच्छी तालीम दें और फिजूलखर्ची से बचें तथा सादगी के साथ अपनी जिंदगी गुजारें। उन्होंने जोर देकर कहा कि आजकल शादी-ब्याह में गाना बजाना, फोटोग्राफी आदि मुसलमानों में बढ़ती जा रही है जो नाजायज है तथा आज कौम के बहुत से परिवारों में ऐसी गरीब लड़कियां बिन-बिहाई बैठी हैं, जिनकी शादियां नहीं हो रही हैं। मुसलमानों को चाहिए कि वह ऐसी गरीब लड़कियों के बारे में सोचें तथा एक दूसरे कि मदद के लिए आगे आएं।मुफ्ती रियासत अली ने कहा कि मुसलमानों में बढ़ती कुरीतियां आज चिंता का विषय है। मुसलमानों को गैर इस्लामी तरीका त्याग कर शरीयत के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिये और एक दूसरे की हमदर्दी, भाईचारा व सादगी का संदेश देना चाहिए। जो जिंदगी हमारे नबियों और सहाबिओं ने गुजारी है, हमें भी ऐसा जीवन जीने के लिए उनके जीवन को आधार का तरीका मानकर इस्लामी तरीका को अपनाना चाहिए। मुफ्ती मोहम्मद कासिम, मुफ्ती बिन यासीन और मौलाना नवाब अली आदि ने भी जलसे को खिताब किया। जलसे का आगाज कारी अबूजर हुसैन की तिलावत व कारी नौशाद अली के नातेपाक से हुआ। इस अवसर पर मौलाना जावेद अली, कारी अब्दुल रऊफ, मौलाना मोहम्मद इकराम, कारी मुकर्रम अली आदि सहित बड़ी संख्या में लोगों ने जलसे में शिरकत की। अंत में कौम की तरक्की, देश-प्रदेश की खुशहाली और अमन-शांति की विशेष दुआ की गई।
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