हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। प्रयः हम देखते हैं कि अपने बच्चों का नाम हम महापुरूषों या देवताओं के नाम पर रखते हैं ताकि जब हम उन्हें पुकारें तो स्वतः भगवान का नाम मुँह से निकले लेकिन यह प्रयास सदैव विफल होता है साथ ही जब बच्चों को हम उत्तेजित होकर गाली देते हैं तो देवताओं के लिए असम्माननीय साबित होता है व बड़े होकर यदि कोई अनैतिक कार्य करता है तो भी बदनाम तो नाम ही होता है जैसे राम रहीम, आशाराम आदि अनेकों उदाहरण देखने को मिलते हैं, तो क्या यह जायज है इसलिए हमें ऐसा नहीं करना चाहिए क्यों कि किसी भी महापुरुष पीर पैंगर जैसे बनने के लिए सिर्फ अपना नाम उनके नाम पर रखने से सफल नहीं हो सकते उनकी शक्ति उनके कार्यभी तो देंखें व सोचें कि क्या आप उनके पदचिन्हों पर चल सकते हैं? नहीं, तो फिर उनका नाम बदनाम करने का अधिकार भी आपको नहीं है उनका नाम ले उन्हे सदैव नमन करें उनकी पूजा या इबादत करें यह हमारा फर्ज है कर्तब्य है ना उनके नाम पर बच्चों के नाम रख कर हम दुनियां में मजाक या निंदा का पात्र बनायें।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। प्रयः हम देखते हैं कि अपने बच्चों का नाम हम महापुरूषों या देवताओं के नाम पर रखते हैं ताकि जब हम उन्हें पुकारें तो स्वतः भगवान का नाम मुँह से निकले लेकिन यह प्रयास सदैव विफल होता है साथ ही जब बच्चों को हम उत्तेजित होकर गाली देते हैं तो देवताओं के लिए असम्माननीय साबित होता है व बड़े होकर यदि कोई अनैतिक कार्य करता है तो भी बदनाम तो नाम ही होता है जैसे राम रहीम, आशाराम आदि अनेकों उदाहरण देखने को मिलते हैं, तो क्या यह जायज है इसलिए हमें ऐसा नहीं करना चाहिए क्यों कि किसी भी महापुरुष पीर पैंगर जैसे बनने के लिए सिर्फ अपना नाम उनके नाम पर रखने से सफल नहीं हो सकते उनकी शक्ति उनके कार्यभी तो देंखें व सोचें कि क्या आप उनके पदचिन्हों पर चल सकते हैं? नहीं, तो फिर उनका नाम बदनाम करने का अधिकार भी आपको नहीं है उनका नाम ले उन्हे सदैव नमन करें उनकी पूजा या इबादत करें यह हमारा फर्ज है कर्तब्य है ना उनके नाम पर बच्चों के नाम रख कर हम दुनियां में मजाक या निंदा का पात्र बनायें।



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