हरिद्वार की गूंज (24*7)
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी भले ही सम्पूर्ण भारत को स्वच्छ रखने का सपना संजोये हुये सभी जगह अभियान चला कर प्रत्येक गॉव, नगर, शहर को स्वच्छ देखना चाहते हों लेकिन यह सीन देखकर तो आप महशूस कर सकते हैं कि भारत में यह मातृ दिवा स्वप्न ही कहा जा सकता है, यह तस्वीर नवोदय नगर गोल चौक के पास की है जहाँ पर महिनों से कोई सफाई कर्मी डस्टविन का कूड़ा उठाने तक नहीं आया पास में स्थित होटल वालें बताते है कि कहने पर भी कोई कूड़ा उठाने को तैयार नहीं अब सोतनीय बात यह है कि यहाँ नवोदय नगर में कुछ समिति के लोग कभी कूड़े तो कभी पानी के नाम पर मनचाही धन उगाही बेरोकटोक करते आ रहे हैं परन्तु जमीनी सच्चाई आपके सामने है वैसे बात तो गंभीर है ही क्यों कि प्रसाशन भी स्वच्छता के नाम पर मूकदर्शक की भूमिका निभाता है तो फिर दोष किसका है जनता का जिससे पैसा लिया जा रहा है या फिर नगर पालिका शिवालिक नगर का जो कि बार्ड नंबर 13 पर ध्यान नहीं दे रही या फिर विजयी प्रत्याशी का जिसे भारतीय जनता पार्टी के नाम पर लोगों ने बड़े विश्वास के साथ जिताया? लेकिन महशूस होता है कि वोट के बाद प्रत्याशियों का ध्यान नोट की चोट पर ज्यादा रहता है, कूड़े करकट का ढेर खुद अपनी दास्ता बयान कर रहा है।
(शिवाकान्त पाठक) हरिद्वार। माननीय प्रधानमंत्री मोदी जी भले ही सम्पूर्ण भारत को स्वच्छ रखने का सपना संजोये हुये सभी जगह अभियान चला कर प्रत्येक गॉव, नगर, शहर को स्वच्छ देखना चाहते हों लेकिन यह सीन देखकर तो आप महशूस कर सकते हैं कि भारत में यह मातृ दिवा स्वप्न ही कहा जा सकता है, यह तस्वीर नवोदय नगर गोल चौक के पास की है जहाँ पर महिनों से कोई सफाई कर्मी डस्टविन का कूड़ा उठाने तक नहीं आया पास में स्थित होटल वालें बताते है कि कहने पर भी कोई कूड़ा उठाने को तैयार नहीं अब सोतनीय बात यह है कि यहाँ नवोदय नगर में कुछ समिति के लोग कभी कूड़े तो कभी पानी के नाम पर मनचाही धन उगाही बेरोकटोक करते आ रहे हैं परन्तु जमीनी सच्चाई आपके सामने है वैसे बात तो गंभीर है ही क्यों कि प्रसाशन भी स्वच्छता के नाम पर मूकदर्शक की भूमिका निभाता है तो फिर दोष किसका है जनता का जिससे पैसा लिया जा रहा है या फिर नगर पालिका शिवालिक नगर का जो कि बार्ड नंबर 13 पर ध्यान नहीं दे रही या फिर विजयी प्रत्याशी का जिसे भारतीय जनता पार्टी के नाम पर लोगों ने बड़े विश्वास के साथ जिताया? लेकिन महशूस होता है कि वोट के बाद प्रत्याशियों का ध्यान नोट की चोट पर ज्यादा रहता है, कूड़े करकट का ढेर खुद अपनी दास्ता बयान कर रहा है।



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