हरिद्वार की गूंज (24*7)

(अब्दुल सत्तार) हरिद्वार। दुनिया मे जीवन जीने के लिए पढना लिखना बहुत जरूरी है, मनुष्य के जीवन मे रहन सहन खान पान अच्छे बुरे की पहचान सच झूठ सभी बातो को समझने के लिए शिक्षित होना जरूरी है, बिना शिक्षा के मनुष्य दुनिया मे ऐसा है, जैसे अंधा व्यक्ति जिस प्रकार अंधे आदमी को चलने फिरने के लिए सहारे की जरूरत होती है, ठीक इसी प्रकार से अनपढ व्यक्ति है, शिक्षा को अंग्रेजी भाषा (जबान) मे education कहते है,और उर्दू जबान मे तालीम(शिक्षा) कहते है, शिक्षा से ही आदमी का रहन सहन खान पीन पहनावा बोल चाल आदि बदल सकता है, शिक्षा से ही इंसान ज्ञानी जैसे संत, महात्मा, आलिम, फाजिल, इंजीनियर, चिकित्सक, वैज्ञानिक अधिकारी आदि बनते है, और शिक्षा ही एक ऐसी दौलत है, जिसको बांटने पर कमी नही आती है, बल्कि शिक्षा फैलाने से शिक्षा मे (इजाफा) बढोतरी होती है, शिक्षा सभी वर्गो की विकास (तरक्की) व उत्थान का माध्यम है, और शिक्षा प्रत्येक जाति व मजहब के लिए जरूरी है, उसमे सभी शिक्षाएं आती है, वह चाहे हिन्दी, उर्दू,अरबी, अंग्रेजी आदि सभी शिक्षाएं है, समाज के प्रत्येक शिक्षित व्यक्ति को शिक्षा का प्रचार प्रसार करना चाहिए और समाज को शिक्षा हासिल करने के लिए प्रेरित और जागरूक करना चाहिए तब जाकर ही हमारे समाज व देश का विकास हो सकता है, सरकार द्वारा गरीबो की शिक्षा के लिए काफी योजनाएं लागू की जा रही है, लेकिन उन योजनाओं को सही प्रकार से धरातल पर क्रियान्वयन नही हो पा रहा है, उसका कारण शिक्षित लोगो द्वारा अपनी जिम्मेदारियों से भागना है, सरकारी अधिकारी शिक्षा की योजनाओं को केवल कागजो और फाईलो मे भी चला रहे है, उनका सही प्रकार से प्रयोग नही किया जा रहा है, शिक्षा के क्षेत्र मे सरकारी योजनाओं को सही प्रकार से लागू कराना प्रत्येक  शिक्षित आदमी का कर्तव्य है, तब ही हमारे समाज और देश का विकास होगा और भारत ऊंचाइयों को छू सकेगा, इसलिए समाज के सभी सम्मानित बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों, सामाजिक संगठनों को शिक्षा के प्रति गरीबो और समाज को सहयोग देना और जागरूक करने की आवश्यकता है।
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