हरिद्वार की गूंज (24*7)
(रजत चौहान) हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि मनःस्थिति से परिस्थिति को बदला जा सकता है और यह काम समझदार व्यक्ति ही कर सकता है। यह बात प्रणव मुखर्जी फाउण्डेशन द्वारा हिमालयन हिमालयन इन्स्टीट्यूट हास्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) जौलीग्रांट, देहरादून में आयोजित ‘शांति, समरसता एवं उल्लास’ विषय पर सम्मेलन के अध्यात्मवाद एवं परिवर्तन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कही।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि समझदार व्यक्ति को परिस्थति का गुलाम नहीं होना चाहिए, वरन् उसका नव निर्माण करते हुए उच्च स्तर का बनाना चाहिए और यह कार्य अध्यात्मवादी चिंतन रखने वाला, समाज को ऊँचा उठाने की सोच रखने वाला जैसा व्यक्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसान खेत को उर्वर बनाये रखने के लिए सदैव मेहनत करता है, उसी तरह मनुष्य को अपनी आंतरिक प्रतिभा को विकसित करने के लिए मनायोगपूर्वक अध्यात्मवादी चिंतन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता के छठवें अध्याय में श्रीकृष्ण ने इस दिशा में विशेष वर्णन किया है।
अपने जीवन के चार दशक से अधिक का समय समाजोत्थान में लगाने वाले अध्यात्म क्षेत्र के प्रखर वक्ता डॉ. पण्ड्या ने कहा कि विश्व के अनेक देशों में विकास के कई आयाम जुड़े हुए है, किन्तु यदि विकास के साथ शांति की खोज की जाए, तो वह केवल भारत में ही मिल सकती है। साथ ही उन्होंने धर्म और अध्यात्म के अनेक गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में उपस्थित प्रबुद्धों को समझाया। इस अवसर पर चिकित्सकों, वैज्ञानिकों एवं गणमान्य नागरिकों के विविध शंकाओं को समाधान किया।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि धर्म की सही परिभाषा जानना जरुरी है। धर्म केवल मंदिर या कर्मकाण्ड तक सीमित नहीं, वरन् जीवन जीने की कला है। उन्होंने स्वामी राम व पं.श्रीराम शर्मा शर्मा आचार्य जी का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्होंने धर्म को सही रूप में जाना और जनसामान्य को समझाया। इस अवसर पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने मानव शरीर के विभिन्न कोणों की जानकारी दी। इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश के निदेशक डॉ रविकांत जी, कर्नल सुभाष बक्शी आदि प्रबुद्ध प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
(रजत चौहान) हरिद्वार। अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख डॉ. प्रणव पण्ड्या ने कहा कि मनःस्थिति से परिस्थिति को बदला जा सकता है और यह काम समझदार व्यक्ति ही कर सकता है। यह बात प्रणव मुखर्जी फाउण्डेशन द्वारा हिमालयन हिमालयन इन्स्टीट्यूट हास्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी) जौलीग्रांट, देहरादून में आयोजित ‘शांति, समरसता एवं उल्लास’ विषय पर सम्मेलन के अध्यात्मवाद एवं परिवर्तन सत्र की अध्यक्षता करते हुए कही।
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. पण्ड्या ने कहा कि समझदार व्यक्ति को परिस्थति का गुलाम नहीं होना चाहिए, वरन् उसका नव निर्माण करते हुए उच्च स्तर का बनाना चाहिए और यह कार्य अध्यात्मवादी चिंतन रखने वाला, समाज को ऊँचा उठाने की सोच रखने वाला जैसा व्यक्ति कर सकता है। उन्होंने कहा कि जिस तरह किसान खेत को उर्वर बनाये रखने के लिए सदैव मेहनत करता है, उसी तरह मनुष्य को अपनी आंतरिक प्रतिभा को विकसित करने के लिए मनायोगपूर्वक अध्यात्मवादी चिंतन के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता के छठवें अध्याय में श्रीकृष्ण ने इस दिशा में विशेष वर्णन किया है।
अपने जीवन के चार दशक से अधिक का समय समाजोत्थान में लगाने वाले अध्यात्म क्षेत्र के प्रखर वक्ता डॉ. पण्ड्या ने कहा कि विश्व के अनेक देशों में विकास के कई आयाम जुड़े हुए है, किन्तु यदि विकास के साथ शांति की खोज की जाए, तो वह केवल भारत में ही मिल सकती है। साथ ही उन्होंने धर्म और अध्यात्म के अनेक गूढ़ रहस्यों को सरल शब्दों में उपस्थित प्रबुद्धों को समझाया। इस अवसर पर चिकित्सकों, वैज्ञानिकों एवं गणमान्य नागरिकों के विविध शंकाओं को समाधान किया।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कहा कि धर्म की सही परिभाषा जानना जरुरी है। धर्म केवल मंदिर या कर्मकाण्ड तक सीमित नहीं, वरन् जीवन जीने की कला है। उन्होंने स्वामी राम व पं.श्रीराम शर्मा शर्मा आचार्य जी का उदाहरण देते हुए कहा कि इन्होंने धर्म को सही रूप में जाना और जनसामान्य को समझाया। इस अवसर पर स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय, जौलीग्रांट के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने मानव शरीर के विभिन्न कोणों की जानकारी दी। इस अवसर पर एम्स ऋषिकेश के निदेशक डॉ रविकांत जी, कर्नल सुभाष बक्शी आदि प्रबुद्ध प्रमुख रूप से उपस्थित थे।



Post A Comment:
0 comments so far,add yours