हरिद्वार की गूंज (24*7)
(सन्नी तोमर) हरिद्वार। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री चित्रगुप्त मंडल समिति ने चित्रगुप्त जयंती के अवसर पर भव्य श्री चित्रगुप्त पूजन व् हवन का आयोज़न किया इस मौके पर कलम-दवात की पूजा भी की गई। सेक्टर-3 भेल स्थित मंदिर में कायस्थ समाज के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त का पूजन व् हवन कर आरती के उपरान्त प्रसाद वितरण हुआ।हिंदी शास्त्रों के अनुसार चित्रगुप्त भगवान् वह देवता है, जिनका मुख्य काम संसार के सभी मनुष्यों के अच्छे –बुरे कर्मों का लेखा जोखा रखना है । भगवान चित्रगुप्त जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त जीवों के सभी कर्मों को अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं और जब जीवात्मा मृत्यु के पश्चात यमराज के समक्ष पहुँचता है तो उनके कर्मों को एक-एक कर सुनाते हैं और उन्हें अपने कर्मों के आधार पर मृत्यु के बाद उन्हें स्वर्ग अथवा नरक में स्थान प्राप्त होता है।चित्रगुप्त जी भगवान का जन्म यम द्वितीय (भैया दूज के दिन)को हुआ था और उनके जन्मदिन के रूप में कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को चित्रगुप्त जयंती पूजा मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो मनुष्य सच्चे मन से इस चित्रगुप्त भगवान की पूजा व् हवन करता है वह परम् वैकुण्ठ धाम को प्राप्त करता है।सामूहिक कलम दवात पूजन कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष विभास सिन्हा व् सचिव विवेक सक्सेना संग भेल के वरिष्ठ अधिकारी महाप्रबंधक संजय सक्सेना, राकेश श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, संजीव श्रीवास्तव, आदर्श सक्सेना, सुनील श्रीवास्तव, विनोद सक्सेना, अनिल श्रीवास्तव, मंडल पदाधिकारी अक्षत श्रीवास्तव,प्रमोद श्रीवास्तव, कमल कुलश्रेष्ठ, विशाल सक्सेना, अंकित श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, श्रेय श्रीवास्तव, बालकृष्ण श्रीवास्तव व् सम्पूर्ण कायस्थ समाज़ सम्मिलित हुआ।
(सन्नी तोमर) हरिद्वार। गत वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री चित्रगुप्त मंडल समिति ने चित्रगुप्त जयंती के अवसर पर भव्य श्री चित्रगुप्त पूजन व् हवन का आयोज़न किया इस मौके पर कलम-दवात की पूजा भी की गई। सेक्टर-3 भेल स्थित मंदिर में कायस्थ समाज के आराध्य देव भगवान चित्रगुप्त का पूजन व् हवन कर आरती के उपरान्त प्रसाद वितरण हुआ।हिंदी शास्त्रों के अनुसार चित्रगुप्त भगवान् वह देवता है, जिनका मुख्य काम संसार के सभी मनुष्यों के अच्छे –बुरे कर्मों का लेखा जोखा रखना है । भगवान चित्रगुप्त जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त जीवों के सभी कर्मों को अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं और जब जीवात्मा मृत्यु के पश्चात यमराज के समक्ष पहुँचता है तो उनके कर्मों को एक-एक कर सुनाते हैं और उन्हें अपने कर्मों के आधार पर मृत्यु के बाद उन्हें स्वर्ग अथवा नरक में स्थान प्राप्त होता है।चित्रगुप्त जी भगवान का जन्म यम द्वितीय (भैया दूज के दिन)को हुआ था और उनके जन्मदिन के रूप में कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को चित्रगुप्त जयंती पूजा मनाई जाती है। ऐसा माना जाता है कि जो मनुष्य सच्चे मन से इस चित्रगुप्त भगवान की पूजा व् हवन करता है वह परम् वैकुण्ठ धाम को प्राप्त करता है।सामूहिक कलम दवात पूजन कार्यक्रम में समिति के अध्यक्ष विभास सिन्हा व् सचिव विवेक सक्सेना संग भेल के वरिष्ठ अधिकारी महाप्रबंधक संजय सक्सेना, राकेश श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, संजीव श्रीवास्तव, आदर्श सक्सेना, सुनील श्रीवास्तव, विनोद सक्सेना, अनिल श्रीवास्तव, मंडल पदाधिकारी अक्षत श्रीवास्तव,प्रमोद श्रीवास्तव, कमल कुलश्रेष्ठ, विशाल सक्सेना, अंकित श्रीवास्तव, बृजेश श्रीवास्तव, श्रेय श्रीवास्तव, बालकृष्ण श्रीवास्तव व् सम्पूर्ण कायस्थ समाज़ सम्मिलित हुआ।



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